राजगढ़ चिलिंग प्लांट पर बढ़ा दबाव, क्षमता से अधिक पहुंच रहा दूध
Himachalnow / रराजगढ़
राजगढ़ स्थित मिल्क चिलिंग प्लांट पर इन दिनों निर्धारित क्षमता से अधिक दूध पहुंचने के कारण व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्लांट की क्षमता 4500 लीटर प्रतिदिन है, जबकि वर्तमान में लगभग 6000 लीटर दूध की आवक हो रही है। बढ़ती आपूर्ति के कारण प्लांट प्रबंधन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और किसानों की समस्याएं सामने आ रही हैं।
राजगढ़
राजगढ़ स्थित मिल्क चिलिंग प्लांट पर इन दिनों निर्धारित क्षमता से अधिक दूध पहुंचने के कारण व्यवस्था चरमरा गई है। इससे जुड़े दुग्ध उत्पादक किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।मिल्क फेडरेशन राजगढ़ के इंचार्ज अश्वनी कुमार ने बताया कि प्लांट की क्षमता करीब 4500 लीटर प्रतिदिन है, जबकि वर्तमान में यहां लगभग 6000 लीटर दूध की आवक हो रही है। अतिरिक्त दूध के कारण प्लांट प्रबंधन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और इसे संभालना मुश्किल हो रहा है।उन्होंने बताया कि नौहराधार तहसील के टोंडा, गवाही, पिडियाधार, बोगधार, ब्लायनधार, नौहराधार और देवामानल समेत कई क्षेत्रों से रोजाना दूध की सप्लाई यहां पहुंच रही है। उत्पादन में लगातार वृद्धि के चलते प्लांट अपनी निर्धारित सीमा से अधिक भार झेल रहा है।
स्थिति से निपटने के लिए दो विकल्प सामने आए हैं। पहला, मौजूदा प्लांट की क्षमता बढ़ाई जाए और दूसरा, नौहराधार क्षेत्र में नया दुग्ध अभिशीतन केंद्र स्थापित किया जाए। स्थानीय स्तर पर नए प्लांट का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिससे किसानों को राहत मिल सकती है।हाल के वर्षों में सरकार द्वारा गाय का दूध 61 रुपये और भैंस का दूध 71 रुपये प्रति लीटर खरीदने की घोषणा के बाद क्षेत्र में पशुपालन को बढ़ावा मिला है। इसके चलते दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर अब खरीद में कटौती की स्थिति बन रही है। सीमित क्षमता का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।कृषि उपनिदेशक ने जानकारी देते हुए बताया कि बढ़ते दूध उत्पादन और प्लांट की सीमित क्षमता के चलते यह समस्या सामने आई है। विभागीय स्तर पर स्थिति का आकलन किया जा रहा है और जल्द ही समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान न उठाना पड़े।

