जी20 बैठक में भारत ने ऊर्जा ढांचे पर हमलों का किया विरोध, स्थिर LPG आपूर्ति पर जयशंकर का जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी20 विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में होर्मुज में भारत पर हुए हमले को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जाने वाले हमलों पर चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट उत्पादन की कमी के बजाय अनिश्चितता, आपूर्ति में बाधा, ऊंची कीमतों और ऊर्जा तक पहुंच की चुनौतियों से जुड़ा है। उन्होंने भारत की स्वच्छ खाना पकाने की जरूरतों के लिए एलपीजी की भरोसेमंद और स्थिर आपूर्ति पर भी जोर दिया।
अटलांटा
जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे जयशंकर ने कहा कि बाधाओं, प्रतिबंधों और रुकावटों के कारण ऊर्जा बाजारों में लगातार अस्थिरता पैदा हो रही है। ऐसी गतिविधियां अब अधिक बार, जटिल तरीके और व्यापक प्रभाव के साथ सामने आ रही हैं। भारत ने इस स्थिति के बीच कम आय वाले देशों की परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया। जयशंकर के अनुसार, ऊर्जा व्यापार और उससे जुड़े ढांचे पर हमलों के कारण कीमतों तथा आपूर्ति पर दूरगामी असर पड़ सकता है।
एलपीजी की स्थिर आपूर्ति की जरूरत
जयशंकर ने तेल और गैस के मामलों में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में देशों की एक-दूसरे पर निर्भरता और किसी फैसले के व्यापक प्रभाव को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ खाना पकाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए एलपीजी की निरंतर, भरोसेमंद और स्थिर आपूर्ति आवश्यक है। ऊर्जा बाजारों में आने वाली बाधाओं का असर केवल कीमतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे ऊर्जा तक लोगों की पहुंच भी प्रभावित होती है।
महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत का प्रस्ताव
भारत ने जी20 के समक्ष महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े अपने राष्ट्रीय मिशन का भी उल्लेख किया, जिसमें खनिजों की खोज से लेकर उनकी रीसाइक्लिंग तक का दायरा शामिल है। इसके साथ ही भारत ने जी20 के सामने ‘क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलैरिटी इनिशिएटिव’ का प्रस्ताव रखा। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा बाजारों को खुला और स्थिर बनाए रखने के लिए जी20 को समझदारी और नेतृत्व दिखाना होगा। उन्होंने फंडिंग तक पहुंच बढ़ाने के साथ स्टोरेज, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन के क्षेत्रों में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।