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शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव गांधी पर सरकारी आवास कब्जे मामले में 1.80 लाख रुपये का जुर्माना

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 5 Hours Ago • 1 Min Read

शिमला पुलिस मुख्यालय ने पूर्व एसएसपी एवं आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार गांधी पर सरकारी आवास को निर्धारित समय के बाद खाली न करने पर 1,80,286 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन नियमों के तहत अनधिकृत कब्जे और डैमेज चार्ज के आधार पर की गई है।

शिमला

सरकारी आवास खाली न करने पर कार्रवाई

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार गांधी ने शिमला में एसएसपी के लिए आरक्षित सरकारी आवास को निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी खाली नहीं किया। दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने 7 फरवरी, 2026 को एसएसपी पद का कार्यभार छोड़ा था, जिसके बाद नियमों के तहत उन्हें 6 मार्च, 2026 तक आवास खाली करना अनिवार्य था, लेकिन इसके बाद भी आवास पर उनका कब्जा जारी रहा। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 7 मार्च, 2026 से इस आवास को अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में रखा गया और नियमानुसार डैमेज चार्ज लागू किया गया।

नियमों के तहत डैमेज चार्ज तय

हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) नियम, 1994 के नियम 18ए के तहत अनधिकृत कब्जे की स्थिति में 18 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह की दर से डैमेज चार्ज निर्धारित किया जाता है। संबंधित आवास का क्षेत्रफल 331.56 वर्ग मीटर (लगभग 3,568.88 वर्ग फुट) बताया गया है, जिसके आधार पर मासिक डैमेज चार्ज 64,239.87 रुपये तय किया गया। यह गणना मानक दर और निर्धारित क्षेत्रफल के आधार पर विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज है, जिसे नियमों के अनुसार लागू किया गया है।

कुल जुर्माने की गणना

विभागीय गणना के अनुसार जुर्माने की अवधि 7 मार्च से 31 मई, 2026 तक निर्धारित की गई है, जिसमें मार्च के 25 दिन तथा अप्रैल और मई के पूरे दो महीने शामिल हैं। इस अवधि के आधार पर कुल देय राशि 1,80,286.09 रुपये निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार यदि 1 जून, 2026 के बाद भी आवास खाली नहीं किया जाता है, तो अतिरिक्त डैमेज चार्ज प्रतिमाह की दर से अलग से जोड़ा जाएगा और कुल देनदारी में वृद्धि होगी।

वसूली और आगे की कार्रवाई

पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि निर्धारित राशि को तत्काल जमा कराया जाए। यदि राशि जमा नहीं की जाती है, तो इसे संबंधित अधिकारी के मासिक वेतन से वसूला जाएगा। इसके साथ ही विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेशों का पालन न होने की स्थिति में हिमाचल प्रदेश लोक परिसर और भूमि (बेदखली और किराया वसूली) अधिनियम, 1971 के तहत विधिक कार्रवाई कर जबरन बेदखली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।