शिमला में नगर निगम अधिकारी ने दी जान, पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच
Himachalnow / शिमला
शिमला में नगर निगम शिमला में तैनात डिप्टी कंट्रोलर रामेश्वर शर्मा द्वारा जान देने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया है तथा मामले में बीएनएसएस की धारा 194 के तहत कार्रवाई करते हुए मृत्यु के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
शिमला
नगर निगम अधिकारी की घर में मिली लाश
राजधानी शिमला के कसुम्पटी क्षेत्र में नगर निगम शिमला में तैनात डिप्टी कंट्रोलर रामेश्वर शर्मा ने कथित तौर पर फंदा लगाकर जान दे दी। वह मूल रूप से शिमला जिले के चिड़गांव क्षेत्र के सीमा गांव के रहने वाले थे और वर्तमान में परिवार के साथ कसुम्पटी में रह रहे थे। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच प्रक्रिया शुरू की गई। घटना के बाद नगर निगम शिमला के कर्मचारियों और अधिकारियों में भी चर्चा का माहौल रहा।
सुबह कार्यालय पहुंचे, दोपहर में लौटे घर
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रामेश्वर शर्मा शुक्रवार सुबह नियमित रूप से अपने कार्यालय पहुंचे थे। बताया गया कि वह दिन के समय अवकाश लेकर घर लौट आए थे। कुछ समय बाद उनकी पत्नी ने उन्हें कमरे में फंदे से लटका हुआ देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार घटनास्थल से कुछ सामग्री भी बरामद की गई है, जिसकी जांच की जा रही है।
पुलिस विभिन्न पहलुओं से कर रही जांच
एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस कंट्रोल रूम 112 के माध्यम से थाना छोटा शिमला को सूचना प्राप्त हुई थी कि एक व्यक्ति को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया है। पुलिस के अनुसार मामले में बीएनएसएस की धारा 194 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
नगर निगम में कई जिम्मेदारियां संभाल रहे थे अधिकारी
जानकारी के अनुसार रामेश्वर शर्मा नगर निगम शिमला में डिप्टी कंट्रोलर फाइनेंस के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा उन्हें कुछ वार्डों में व्यवस्थाओं की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं। पुलिस के अनुसार मामले में परिजनों और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि की जा सके।