सिरमौर में बेसहारा गोवंश के पुनर्वास की समयसीमा तय, मार्च 2027 से पहले लक्ष्य पूरा करने के निर्देश
सिरमौर जिले को मार्च 2027 से पहले बेसहारा गोवंश मुक्त बनाने के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिले की 228 ग्राम पंचायतों में 302 बेसहारा गोवंश दर्ज हैं। इनके व्यवस्थित पुनर्वास के साथ पशु मालिकों की पहचान, टैगिंग, पंजीकरण और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है। नाहन शहर और नाहन-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।
नाहन
बेसहारा गोवंश के नियंत्रण और पुनर्वास को लेकर उपायुक्त कार्यालय नाहन में जिला समन्वय समिति की बैठक उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में एसडीएम नाहन राजीव सांख्यान भी उपस्थित रहे। पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजीव वालिया ने जिले में बेसहारा गोवंश की स्थिति और पुनर्वास से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान आगे बढ़ाने को कहा है।
जिले में 17 गौशालाओं और गौसदनों की क्षमता 1,540
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सिरमौर जिले में कुल 17 गौशालाएं और गौसदन संचालित हैं, जिनकी सूचित क्षमता 1,540 पशुओं की है। प्रशासन के मुताबिक 8 सितंबर 2026 से अब तक 43 बेसहारा गोवंश को कोटला बड़ोग गौशाला में स्थानांतरित किया जा चुका है। शेष बेसहारा पशुओं के पुनर्वास के लिए अभियान निरंतर अभियान मोड में जारी रखने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य हासिल किया जा सके।
टैगिंग, पंजीकरण और कानून लागू करने पर जोर
उपायुक्त ने पशु मालिकों की पहचान करने, संबंधित कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा पशुओं की टैगिंग और पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बेसहारा गोवंश की नियमित निगरानी भी की जाएगी। नाहन शहर और नाहन-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशेष अभियान का उद्देश्य सड़कों पर घूमने वाले पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम करना और गोवंश का सुरक्षित एवं व्यवस्थित पुनर्वास सुनिश्चित करना है।