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सोमनाथ अमृत महोत्सव 2026: जानिए क्या है ‘कुंभाभिषेक’ और क्यों है यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान

हिमाचलनाउ डेस्क • 5 Hours Ago • 1 Min Read

सोमनाथ मंदिर में अमृत महोत्सव 2026 के तहत पहली बार ‘कुंभाभिषेक’ अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण वैदिक प्रक्रिया है, जिसे मंदिर की पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से किया जाता है। कुंभाभिषेक शब्द दो भागों से मिलकर बना है, जिसमें ‘कुंभ’ का अर्थ पवित्र पात्र या कलश और ‘अभिषेक’ का अर्थ पवित्र स्नान होता है। इस प्रक्रिया में विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देवताओं की मूर्तियों पर अर्पित किया जाता है।

कुंभाभिषेक एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के मंदिरों में 10 से 12 वर्षों के अंतराल पर किया जाता है। इसका उद्देश्य मंदिर में स्थापित देवताओं की ऊर्जा को पुनः जागृत करना होता है। जब कोई मंदिर नया बनता है, तब ‘नूतन कुंभाभिषेकम’ के माध्यम से देव ऊर्जा की स्थापना की जाती है। इसके बाद समय-समय पर इस ऊर्जा को सक्रिय बनाए रखने के लिए पुनः कुंभाभिषेक किया जाता है।

सोमनाथ मंदिर में पहली बार होगा आयोजन

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह अनुष्ठान पहली बार आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। देश के 11 प्रमुख तीर्थ स्थलों से पवित्र जल एकत्रित कर मंदिर के ऊंचे शिखर पर अभिषेक किया जाएगा। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ पुजारी मंदिर के शिखर का स्नान कराएंगे। मान्यता है कि शिखर पर अर्पित किया गया यह जल ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित कर गर्भगृह में स्थित शिवलिंग में समाहित कर देता है।

कुंभाभिषेक की प्रक्रिया

इस अनुष्ठान की शुरुआत मंदिर परिसर में यज्ञशाला के निर्माण से होती है, जहां पूरे आयोजन के लिए वैदिक विधियां संपन्न की जाती हैं। इसमें कई हवन कुंड बनाए जाते हैं और पवित्र नदियों के जल से भरे कलश स्थापित किए जाते हैं। विद्वान पंडित कई दिनों तक मंत्रों का जाप करते हैं, जिससे जल अभिमंत्रित हो जाता है। निर्धारित दिन पर इन कलशों को भव्य शोभायात्रा के रूप में मंदिर के शिखर तक ले जाया जाता है, जहां मंत्रोच्चार और वाद्य यंत्रों की ध्वनि के बीच जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद गर्भगृह में स्थित मुख्य मूर्तियों का भी उसी पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है, जिससे मंदिर की ऊर्जा पुनः जागृत होने की मान्यता है।