ऊना के लाल सिंघी में झुग्गियों में भीषण आग, 50 के करीब झुग्गियां जलकर राख, लाखों का नुकसान
Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल
ऊना के साथ लगते गांव लाल सिंघी में शुक्रवार दोपहर प्रवासी मजदूरों की झुग्गियों में अचानक भीषण आग लग गई, जिससे करीब 36 से अधिक झुग्गियां जलकर राख हो गईं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह आंकड़ा 50 तक भी पहुंच सकता है और लाखों का नुकसान हुआ है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
ऊना
जिला ऊना के साथ लगते गांव लाल सिंघी में शुक्रवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब प्रवासी मजदूरों की झुग्गियों में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और करीब 36 से अधिक झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया। वहीं स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह आंकड़ा 50 झुग्गियों तक भी पहुंच सकता है।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग की शुरुआत एक झुग्गी में जल रहे चूल्हे से हुई, जिसके बाद तेजी से लपटें आसपास बनी अन्य झुग्गियों तक फैल गईं। आग इतनी भयावह थी कि झुग्गियों में रखा नकदी, आभूषण, कपड़े, राशन और दैनिक उपयोग का सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया।
घटना में राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन आर्थिक नुकसान लाखों रुपये में आंका जा रहा है।पीड़ित परिवारों ने बताया कि वे झुग्गी लगाने के लिए जमीन मालिक को हर महीने करीब 500 रुपये किराया देते हैं, लेकिन यहां उन्हें किसी प्रकार की मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जाती। पीड़ितों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।एक महिला पीड़िता ने बताया कि वह कुछ दिन पहले ही गांव में शादी समारोह से वापस लौटी थी और उसके चांदी के गहने भी आग में जल गए।
घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए अब तक 8 दमकल गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया है। विभाग की टीम ने काफी हद तक आग को फैलने से रोक लिया है, जबकि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची और प्रभावित परिवारों को नुकसान के आधार पर फौरी राहत राशि उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा है, जबकि प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं।

