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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल से मिला सहारा, मोबाइल रिपेयरिंग व्यवसाय से आत्मनिर्भर बना ऊना का युवा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

ऊना जिले के बहडाला गांव का 26 वर्षीय अविनाश बचपन में माता-पिता के निधन के बाद कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए जीवन में संघर्ष करता रहा। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता और सहयोग से उसने मोबाइल रिपेयरिंग का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर जीवन स्थापित किया।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

ऊना जिले के बहडाला गांव के 26 वर्षीय अविनाश की जिंदगी कभी गहरे संघर्षों से घिरी हुई थी। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के बाद उनके सामने जीवनयापन और भविष्य दोनों बड़ी चुनौती बन गए थे। लेकिन हौंसले, कड़ी मेहनत और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से मिले सहयोग ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज अविनाश ऊना शहर की कपिला मार्केट में अपना मोबाइल रिपेयरिंग एवं एक्सेसरीज का सफल कारोबार संचालित कर सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।

अविनाश जब पांचवीं कक्षा में थे, तभी उनके पिता, जो दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, का निधन हो गया। उसके बाद उनकी मां ने सीमित संसाधनों में दोनों बेटों का पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी निभाई। लेकिन कुछ वर्षों बाद, अविनाश की मां भी स्वर्ग सिधार गईं । कम उम्र में ही माता-पिता दोनों का साया उठ जाने से जीवन की सारी जिम्मेदारियां दोनों भाइयों के कंधों पर आ गईं।

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अविनाश ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। दसवीं की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने नंगल में मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के उपरांत उन्होंने विभिन्न मोबाइल रिपेयरिंग दुकानों में लगभग सात वर्षों तक कार्य कर व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। अनुभव और आत्मविश्वास के बल पर दो वर्ष पहले उन्होंने ऊना की कपिला मार्केट में किराये पर एक छोटी-सी दुकान लेकर अपना मोबाइल रिपेयरिंग एवं एक्सेसरीज का कारोबार शुरू किया। शुरुआत में दुकान पर केवल मोबाइल रिपेयरिंग की सुविधा, कुछ सेकेंड हैंड मोबाइल फोन और सीमित मोबाइल एक्सेसरीज ही उपलब्ध थीं। मेहनत, ईमानदारी और बेहतर सेवा के कारण ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ता गया, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कारोबार का विस्तार आसान नहीं था।

सुख आश्रय से मिला सहारा

इसी दौरान मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उनके जीवन में नई उम्मीद बनकर आई। योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी मिली। इस सहयोग से उन्होंने दुकान का विस्तार किया, आधुनिक उपकरण खरीदे और मोबाइल रिपेयरिंग के साथ अन्य तकनीकी सेवाएं भी शुरू कीं। योजना के तहत उनके भाई को भी प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है।

आज अविनाश की दुकान पर नए एवं सेकेंड हैंड मोबाइल फोन, मोबाइल एक्सेसरीज तथा मोबाइल रिपेयरिंग सहित विभिन्न तकनीकी सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रतिदिन करीब 50 से 60 ग्राहक उनकी दुकान पर पहुंचते हैं। इस व्यवसाय से वे प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। ग्राहकों के बढ़ते विश्वास और बेहतर सेवाओं के दम पर उनका कारोबार लगातार आगे बढ़ रहा है तथा अब वे अपने व्यवसाय का और विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।

अविनाश कहते हैं कि माता-पिता के निधन के बाद कई बार लगा कि अब आगे बढ़ पाना मुश्किल होगा। लेकिन मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से मिले सहयोग ने मुझे अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया।  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए वे कहते हैं कि सरकार की सहायता ने उन्हें  आर्थिक संबल देने के साथ ही अपने भविष्य पर दोबारा भरोसा करना भी सिखाया। आज वे आत्मनिर्भर हैं और अपने मोबाइल रिपेयरिंग कारोबार का विस्तार करना चाहते हैं।

सरकार ही परिवार, सीएम सुक्खू की संवेदनशील सोच का सुफल है मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर 28 फरवरी, 2023 को शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना ऐसे बच्चों और युवाओं को सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास है, जिन्होंने कम उम्र में माता-पिता का संरक्षण खो दिया है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा दिया है। सरकार पात्र बच्चों की 27 वर्ष की आयु तक शिक्षा, देखभाल और अन्य आवश्यक जरूरतों की जिम्मेदारी निभा रही है। योजना के तहत पात्र युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

ऊना में 10 युवाओं को 20 लाख

जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) ऊना हरीश मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में अब तक 84 युवा इस सहायता से अपना व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। ऊना जिले में भी माइक्रो एंटरप्राइज स्थापित करने के लिए 10 युवाओं को 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।

डीसी बोले..हर पात्र बच्चे तक लाभ पहुंचाने को प्रतिबद्ध

उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समय पर पहुंचे। इसके लिए पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ा जा रहा है, ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा इस महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित न रहे।

एक नजर में : मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना में स्वरोजगार के लिए मदद

28 फरवरी, 2023 को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर योजना शुरू की गई।

हिमाचल प्रदेश अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा देने वाला देश का पहला राज्य है।

प्रदेश के  6,000 निराश्रित बच्चों को योजना से जोड़ा गया है।

सरकार पात्र बच्चों की 27 वर्ष की आयु तक शिक्षा, देखभाल और अन्य आवश्यक जरूरतों की जिम्मेदारी निभा रही है।

पात्र युवाओं को स्वरोजगार के लिए दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।

प्रदेश में अब तक 84 युवा इस सहायता से अपना व्यवसाय शुरू कर चुके हैं।

ऊना जिले में माइक्रो एंटरप्राइज स्थापित करने के लिए 10 युवाओं को 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।

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