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Yogini Ekadashi / योगिनी एकादशी आज, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, मंत्र, पारण समय और जरूरी नियम जानें

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Yogini Ekadashi : योगिनी एकादशी व्रत 10 और 11 जुलाई को तिथि के अनुसार मनाया जा रहा है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपने संप्रदाय और परंपरा के अनुसार व्रत, पूजा विधि, पारण समय और अन्य धार्मिक नियमों का पालन कर सकते हैं। व्रत से जुड़ी तिथि और समय की जानकारी के अनुसार श्रद्धालु अपनी तैयारी कर सकते हैं।

योगिनी एकादशी व्रत का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार योगिनी एकादशी भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। गृहस्थ और वैष्णव परंपराओं में व्रत की तिथि और पारण समय में अंतर हो सकता है, इसलिए श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत का पालन करते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

योगिनी एकादशी पर शुभ चौघड़िया के अनुसार पूजा के लिए तीन प्रमुख समय बताए गए हैं। चर मुहूर्त सुबह 05:31 बजे से 07:15 बजे तक, लाभ मुहूर्त सुबह 07:15 बजे से 08:59 बजे तक और अमृत मुहूर्त सुबह 08:59 बजे से 10:42 बजे तक रहेगा। इन समयों में पूजा, जप और आराधना करना शुभ माना जाता है।

पूजा विधि और मंत्र

प्रातः स्नान के बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद घी का दीपक जलाकर धूप, पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। पूजा में चंदन, अक्षत, पीले पुष्प, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप किया जाता है और आरती की जाती है।

एकादशी पर क्या खाएं और क्या न खाएं

व्रत के दौरान फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, शकरकंद, सूखे मेवे, सेंधा नमक, नारियल और नारियल पानी का सेवन किया जाता है। कई श्रद्धालु व्रत में हल्का और सात्विक भोजन लेते हैं। दूसरी ओर चावल, गेहूं, जौ, मक्का, बाजरा, रागी, दालें और सामान्य नमक का सेवन नहीं किया जाता। व्रत के नियम परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं, लेकिन अनाज और दालों से परहेज सामान्य रूप से रखा जाता है।

विष्णु पूजा में इन चीजों को करें शामिल

पूजा में तुलसी दल के साथ पीले पुष्प, कमल, गेंदा, चमेली, पारिजात, मालती और कदंब के फूल अर्पित किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार आंवला भी भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर पूजा के बाद विष्णु कथा का श्रवण, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन किया जाता है। आंवले को लेकर यह मान्यता है कि उसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है, इसलिए इसे पूजा सामग्री में शामिल किया जाता है।

व्रत पारण की विधि

द्वादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर तुलसी दल, पीले पुष्प और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। पहले भगवान को भोग लगाया जाता है, फिर चरणामृत या तुलसी युक्त जल ग्रहण किया जाता है। इसके बाद फल या सात्विक भोजन से व्रत का पारण किया जाता है। पारण का समय और विधि स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार तय की जाती है।

इन राशियों के लिए शुभ माना गया दिन

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन अनुकूल माना गया है। इन राशियों के लिए करियर, आर्थिक मामलों और पारिवारिक जीवन से जुड़े अवसरों की संभावना बताई गई है। हालांकि यह आकलन धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है।

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