आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, मातृत्व अवकाश पर शर्त थोपना महिला विरोधी
पांवटा साहिब में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित समस्याओं एवं मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराते हुए मातृत्व अवकाश शर्त, हिम-केयर बंद होने और लंबित मानदेय जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
पांवटा साहिब
पांवटा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन: “मातृत्व अवकाश पर शर्त थोपना महिला विरोधी”
– लंबित मानदेय जारी करने और FRS ऐप हटाने की मांग, हिम-केयर सुविधा बहाल करने की अपील
पाँवटा साहिब – राष्ट्रीय आह्वान के तहत, आज आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ने प्रोजेक्ट पाँवटा साहिब में अपनी लंबित मांगों और समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रोजेक्ट पाँवटा अध्यक्ष इंदु तोमर, महासचिव देव कुमारी, और जिला कमेटी सदस्य गुलाबी के नेतृत्व में यूनियन ने उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) पाँवटा साहिब के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को एक विस्तृत मांग-पत्र सौंपा।
लगातार बढ़ती समस्याओं के विरोध में यूनियन की आवाज़ बुलंद
प्रतिनिधिमंडल में माया, रजनी, रेशम कौर, शकुंतला, पूनम, मंजू, नीरू, रमा, पूनम सहित लगभग दो दर्जन कार्यकर्ता शामिल रहीं। यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आंगनवाड़ी बहनों की लगातार बढ़ती समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
मातृत्व अवकाश पर सेवा-शर्त को बताया अवैध और महिला-विरोधी
यूनियन ने मातृत्व अवकाश को एक वर्ष की सेवा से जोड़ने को अवैध बताया। इंदु तोमर और देव कुमारी ने कहा कि यह मातृत्व लाभ अधिनियम 1961, संशोधन 2017 और संविधान अनुच्छेद 42 का सीधा उल्लंघन है।
उन्होंने कहा, “मातृत्व अवकाश पहले दिन से अधिकार है। महिलाओं पर शर्तें थोपना महिला-विरोधी नीति है। इसे तुरंत रद्द किया जाए।”
हिम-केयर लाभ बंद होना अमानवीय: यूनियन की आपत्ति
जिला कमेटी सदस्य गुलाबी ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बनने के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हिम-केयर कार्ड निष्क्रिय हो गए हैं और नए कार्ड भी नहीं बन रहे, जिससे कई परिवार स्वास्थ्य सुरक्षा से बाहर हो गए हैं।
यूनियन ने कहा, “न्यूनतम मानदेय पर काम करने वाली आंगनवाड़ी बहनों को स्वास्थ्य योजनाओं से बाहर करना अमानवीय और अस्वीकार्य है।”
मुख्य मांगें: मानदेय जारी हो, FRS ऐप हटे, मातृत्व अवकाश बिना शर्त लागू हो
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि तीन माह से लंबित केंद्र का मानदेय तत्काल जारी किया जाए। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ता तुरंत लागू किया जाए।
यूनियन ने FRS ऐप की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की क्योंकि इससे लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने कहा कि मातृत्व अवकाश पहले दिन से लागू किया जाए और एक वर्ष की सेवा शर्त तुरंत हटाई जाए।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए मांग की गई कि आयुष्मान कार्ड बनने के बावजूद हिम-केयर लाभ बंद न किए जाएं और कार्ड की तकनीकी समस्याओं को दूर किया जाए।
मांगें न मानी गईं तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन ने कहा कि यदि सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो संघर्ष प्रदेशव्यापी स्तर पर और अधिक तीव्र किया जाएगा।