मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य में आपदा प्रभावित लोगों को स्थायी रूप से बसाने के लिए वन भूमि की आवश्यकता है। जब तक नया आवास नहीं बनता, तब तक किराया सहायता भी दी जाएगी।
शिमला
वन भूमि पर पुनर्वास की मांग, केंद्र सरकार से अनुमति की अपील
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि आपदा में सब कुछ गंवा चुके लोगों को फिर से बसाने के लिए राज्य को वन भूमि की आवश्यकता है, ताकि वहां स्थायी मकान बनाकर उन्हें सुरक्षित जीवन दिया जा सके। इसके लिए केंद्र सरकार से विशेष अनुमति की मांग की गई है।
अस्थायी राहत के तौर पर किराया सहायता की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक आपदा प्रभावितों को स्थायी घर नहीं मिलते, तब तक उन्हें अस्थायी राहत के रूप में किराया सहायता दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति परिवार ₹5,000 प्रतिमाह और शहरी क्षेत्रों में ₹10,000 प्रतिमाह की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री बोले – पुनर्वास मानवीय कर्तव्य, हर प्रभावित को मिलेगा नया ठिकाना
सुक्खू ने कहा कि यह सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि जिन परिवारों ने अपना घर, जमीन और शांति खो दी है, उन्हें सम्मानजनक जीवन दिया जाए। पुनर्वास प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है और सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और स्थायी बसेरा देने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार कर रही दीर्घकालिक योजना पर काम
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कार्य कर रही है। प्रस्तावित पुनर्वास कॉलोनियों में सभी बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, सड़क और शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विस्थापितों को जीवन दोबारा शुरू करने में कोई कठिनाई न हो।
बादल फटने जैसी घटनाओं पर वैज्ञानिक और पर्यावरणीय अध्ययन जरूरी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस बात पर भी जोर दिया कि हाल के वर्षों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं और इनके पीछे के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारणों का गहराई से अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा अध्ययन न केवल आपदा प्रबंधन की रणनीतियों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन को समझने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार होगा।

