उच्च न्यायलय के अल्टीमेटम पर परिवहन विभाग ने जारी किया एचपी 33 एफ 0001 नंबर
11 वर्षो में 4 बार उच्च न्यायलय दे चुका था नंबर अलॉट करने के आदेश, नही की जा रही थी तामिल
HNN/ मंडी
11 साल पुराने एक मामले में उच्च न्यायलय के 48 घंटे के अल्टीमेटम पर परिवहन विभाग ने आखिर 11 घंटे में एचपी 33 एफ 0001 नंबर जारी किया। उक्त मामले में हाइकोर्ट पिछले 11 वर्षो में चार बार प्रार्थी के पक्ष में आदेश जारी कर चुका था लेकिन परिवहन विभाग ने हमेशा आदेशो को ठेंगा दिखाया। मामला सुंदर नगर के समाजसेवी व व्यवसाई अश्वनी से सबंधित है। 2012 में उन्होंने पहले आओ पहले पाओ आधार पर विशेष नम्बर 0001 के लिए आरएलए मंडी,सुंदरनगर और फिर देहरा के समक्ष अप्लाई किया।
लेकिन कोई अप्रोच ना होने के चलते विभिन्न स्थानों पर उपल्ब्ध 0001 नंबर उन्हे अलॉट ना किया गया। जिस पर अश्वनी सैनी द्वारा 2013 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। जिसकी अंतिम सुनवाई हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायधीश राजीव शर्मा और सुरेश्वर ठाकुर ने 13 नवंबर 2014 को करते हुए उस समय के परिवहन सचिव गोपाल शर्मा को नंबर 0001 अलॉट करने के आदेश जारी किए। लेकिन परिवहन सचिव गोपाल शर्मा और विभाग से बार बार मांग की गई लेकिन परिवहन विभाग ने उन्हें नंबर अलॉट ना किया।
जिस पर अश्वनी सैनी ने पुन: उच्च न्यायलय के समक्ष वर्ष 2020 में याचिका दायर की। परिवहन निदेशालय ने उच्च न्यायलय को अवगत करवाया कि प्रदेश मंत्रिमंडल ने 19 मार्च 2021 को एचपी 33एफ 0001 नंबर अश्वनी सैनी को अलॉट करने हेतु विशेष अप्रूवल प्रदान कर दी है और विभागीय आदेश एसडीएम मंडी को जारी किए है कि विशेष छूट के आधार पर एचपी 33एफ 0001 नम्बर प्रार्थी को अलॉट कर दिया जाए। जिस पर उच्च न्यायलय के न्यायधीश तिरलोक सिंह चौहान और सत्येन वैद्य की अदालत द्वारा 6 नवंबर2021 को मामले में अंतिम आदेश जारी कर दिए।
लेकिन फिर भी परिवहन विभाग ने नंबर जारी नही किया। हालाँकि उस समय के एसडीएम रितिका जिंदल द्वारा आगामी कार्यवाही कर परिवहन निदेशालय को पत्र लिख नंबर अलॉटमेंट हेतु पोर्टल में जरूरी प्रावधान करने हेतू बार बार आग्रह किया लेकिन कोई सुनवाई नही हुई। अप्लाई करने के तकरीबन 6 माह बाद प्रार्थी को एचपी 33 एफ 0001 की जगह एचपी 33 एफ 3773 क्रमांक पंजीकृत कर दिया गया।
जिस पर प्रार्थी अश्वनी द्वारा विभाग के रवैये से तंग आकर पुनः तीसरी बार 2023 में उच्च न्यायलय में न्यायधीश तिरलोक सिंह चौहान और सत्येन वैद्य की अदालत में याचिका दायर की जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायलय ने अश्वनी सैनी को एचपी 33 एफ 0001 अलॉट करने के पूराने आदेशो को एक माह में पालना के आदेश दिए। लेकिन कोई सुनवाई नही की। जिस पर उच्च न्यायलय ने 25 जुलाई को पुनः सुनवाई करते हुए परिवहन निदेशक अनुपम कश्यप को 48 घंटे का अल्टिमेटम देते हुए प्रार्थी से एक लाख फीस ले नंबर अलॉट करने के आदेश जारी किए और इस संबंध में 28 जुलाई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने व हाजिर होने के फरमान जारी किए।
तद्पश्चात विभाग ने फौरी कार्यवाही करते हुए 11 घंटे में नंबर अलॉटमेंट की ओपचारिकताएं पूरी कर नंबर अलॉट कर दिया। परिवहन विभाग के तानाशाही पूर्ण रवैये के चलते न्याय में देरी हुई है जिसके चलते चौथी दफा मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। हाईकोर्ट ने विभाग को पुराने आदेशो की पालना हेतु 48 घंटे का समय दिया था अब नंबर एक दिन में ही जारी कर दिया गया।