ऊना जिला अस्पताल के सभागार में गुरुवार को जिला क्षय रोग उन्मूलन समिति की बैठक आयोजित हुई। उपायुक्त जतिन लाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिले में टीबी उन्मूलन के प्रयासों और कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
समन्वय और सामुदायिक भागीदारी पर जोर
बैठक में उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामुदायिक भागीदारी और जन-जागरूकता ही इस अभियान को सफलता तक पहुंचाने की कुंजी हैं।
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टीबी उन्मूलन के आंकड़े और गतिविधियां
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत रोगियों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और पोषण सहायता सुनिश्चित की जा रही है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विशाल ठाकुर ने प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी कि जिले में अब तक उच्च-जोखिम समूह के 1,01,121 लोगों की पहचान हुई है, जिनमें से लगभग 53,000 लोगों के एक्स-रे किए जा चुके हैं। जुलाई तक 525 क्षय रोगी चिन्हित हुए हैं और सभी का निशुल्क उपचार चल रहा है।
संसाधनों और सुविधाओं की मांग
डॉ. विशाल ठाकुर ने विभाग की आवश्यकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 3 नई एक्स-रे मशीनें, पोर्टेबल कैनोपी, लैपटॉप, निक्षय शिविरों हेतु बजट, 2 वाहन और रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता है। उपायुक्त ने इन प्रस्तावों को एनएचएम शिमला को भेजने की सहमति दी।
अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में जिला परिषद अध्यक्षा नीलम कुमारी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मनकोटिया, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. किरण शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पुष्पिंदर राणा सहित स्वास्थ्य व प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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