एसएफआई ने एबीवीपी के हमले के खिलाफ किया प्रदर्शन, सख्त कार्रवाई की मांग
Himachalnow / शिमला
उपायुक्त कार्यालय के बाहर एसएफआई का धरना, एसपी शिमला को सौंपा ज्ञापन
विश्वविद्यालय कैंपस में एबीवीपी पर प्रतिबंध लगाने की मांग
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एसएफआई के कार्यकर्ताओं पर हुए हमले के खिलाफ आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान एसएफआई ने एसपी शिमला को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए किया गया हमला
एसएफआई राज्य कमेटी के आह्वान पर इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। कैंपस सचिवालय सदस्य कामरेड सुनील ने कहा कि जब एसएफआई छात्रों के मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही थी, तब आंदोलन को कमजोर करने के लिए एबीवीपी ने यह हमला किया। इस हमले में एसएफआई के सात कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि एबीवीपी के गुंडों ने कैंपस में दराटों से हमला किया ताकि एसएफआई की 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल को रोका जा सके। एसएफआई ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में एबीवीपी पर प्रतिबंध लगाया जाए।
एबीवीपी पर माहौल खराब करने का आरोप
राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि एसएफआई कार्यकर्ताओं पर हमला करने वाले वही लोग हैं जिन्होंने हाल ही में संजौली में सांप्रदायिकता फैलाने का प्रयास किया था और पत्थरबाजी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड के बाद विश्वविद्यालय में शिक्षा का भगवाकरण किया जा रहा है। फर्जी प्रोफेसरों की नियुक्ति की गई और आरएसएस से जुड़े लोगों को पदों पर बैठाया गया। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा लाई गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को राज्य में लागू कर शिक्षा को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को सब्सीटाइज और नॉन-सब्सीटाइज श्रेणियों में बांटा जा रहा है, जिससे शिक्षा तक उनकी पहुंच सीमित हो रही है। एसएफआई इस निजीकरण और भगवाकरण के खिलाफ संघर्ष कर रही है, लेकिन एबीवीपी इसे रोकने के लिए हिंसा का सहारा ले रही है।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
धरना प्रदर्शन के बाद एसएफआई राज्य कमेटी ने एसपी शिमला को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एसएफआई ने कहा कि घटना को दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक केवल 11 हमलावरों की गिरफ्तारी हुई है।
एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन एबीवीपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करता है, तो एसएफआई इसके खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।