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सपैल वैली ऐतिहासिक भूंडा महायज्ञ / पांच बावड़ियों का पवित्र जल बुधवार को पहुंचा देवता बकरालू के मंदिर, 39 साल बाद भूंडा महायज्ञ का आयोजन

हिमाचलनाउ डेस्क | 26 दिसंबर 2024 at 11:33 am

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रोहड़ू सपैल वैली: हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू क्षेत्र के सपैल वैली में 39 साल बाद ऐतिहासिक भूंडा महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा है, और इसके लिए स्थानीय लोग कई सालों से तैयारियों में जुटे हुए थे। भूंडा महायज्ञ की असली रस्में 2 जनवरी से शुरू होंगी।


पवित्र जल की पूजा और अनुष्ठान की शुरुआत

भूंडा महायज्ञ की शुरुआत के लिए जरूरी पवित्र जल बुधवार को देवता बकरालू के मंदिर में पहुंचाया गया। इस जल को पांच बावड़ियों से एकत्रित किया गया और इसे ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर तक पहुंचाया गया। इस दौरान ब्राह्मणों ने पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर की सफाई की। इसके बाद हवन कुंड को खोलने के लिए तैयारियां शुरू हो गईं।

जल की महत्वता और अनुष्ठान की प्रक्रिया

यह जल धार्मिक अनुष्ठान के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इसे मंदिर में पहुंचाने के बाद मुख्य हवन कुंड को खोला जाएगा। 39 साल बाद जब हवन कुंड खोला जाएगा, तो इस महायज्ञ का आधिकारिक रूप से आगाज होगा। मंदिर में रात भर कारदार और हवन कमेटी की उपस्थिति रहेगी, जो सुनिश्चित करेंगे कि हवन कुंड की प्रक्रिया बिना किसी विघ्न के चले।

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भूंडा महायज्ञ की प्रमुख रस्में

भूंडा महायज्ञ के मुख्य धार्मिक कार्य 2 जनवरी से शुरू होंगे। इन रस्मों का समय और अनुक्रम इस प्रकार है:

  • 2 जनवरी: यज्ञ स्थल पर देवताओं और मेहमानों का स्वागत किया जाएगा।
  • 3 जनवरी: देवता के मंदिर में शिखा पूजन होगा, जिसमें मंदिर की छत पर पूजा-अर्चना की जाएगी।
  • 4 जनवरी: मुख्य रस्म, जिसे बेड़ा कहा जाता है, में एक व्यक्ति को रस्सी से बांधकर खाई पार कराई जाएगी।
  • 5 जनवरी: देवताओं की विदाई का कार्यक्रम, जिसे उच्छड़ पाछड़ कहते हैं, संपन्न होगा।

39 साल बाद हुआ भूंडा महायज्ञ

यह अनुष्ठान 39 साल बाद आयोजित हो रहा है। पिछली बार इस महायज्ञ का आयोजन 1985 में हुआ था। इस बार के आयोजन की तैयारी लगभग 5 साल से चल रही थी, और पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा है।


नौ गांवों के लोग कर रहे हैं मेज़बानी

इस बार के भूंडा महायज्ञ की मेज़बानी में सपैल वैली के नौ गांव शामिल हैं। इन गांवों के लोग अपने-अपने घरों में मेहमानों का स्वागत करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। रामपुर तहसील के दलोग, शरण जरासी, और नरैण पंचायत के लोग इस आयोजन के मुख्य मेज़बान माने जाते हैं। पिछले एक महीने से इन गांवों के लोग दूर-दूर के रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को निमंत्रण भेज रहे हैं।


विधायक ने तैयारियों का लिया जायज़ा

इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने मंदिर पहुंचकर तैयारियों का जायज़ा लिया। उन्होंने मंदिर कमेटी से यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर चर्चा की। इस आयोजन में हजारों लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।


देवता बकरालू और अन्य देवताओं की सहभागिता

इस महायज्ञ में देवता बकरालू, देवता मोहरिश, देवता बौंद्रा, और देवता महेश्वर प्रमुख रूप से शामिल होंगे। इस अवसर पर रधुनाथ झामटा, जो कि देवता बकरालू के मोतमीन हैं, ने कहा कि मंदिर की ओर से अनुष्ठान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए मेहमानों और ग्रामीणों से सहयोग की अपील की।


निष्कर्ष: एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन

39 साल बाद हो रहे इस भूंडा महायज्ञ में पूरी सपैल वैली और आसपास के इलाके के लोग हिस्सा ले रहे हैं। यह एक बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो पूरे क्षेत्र की परंपराओं को जीवित रखेगा। इस महायज्ञ के माध्यम से स्थानीय लोग अपने धार्मिक विश्वासों को पुनः प्रकट करेंगे और इस अनुष्ठान से क्षेत्रीय एकता को भी बढ़ावा मिलेगा।


इस लेख को व्यवस्थित और आसान बनाने के लिए मैंने इसे प्रमुख शीर्षकों और उपशीर्षकों में विभाजित किया, ताकि पाठक आसानी से सभी महत्वपूर्ण जानकारी पढ़ सकें।

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