“ऐसी मूंजरे जोगी जवाना” नामक नाटी पर पीरन मेले मेें झूमे लोग

People danced in Piran fair on a dance called "Aisi Moonjre Jogi Jawana"

पीरन में भैया दूज पर आयोजित मेला धूमधाम से सम्पन्न

HNN / शिमला

भैया दूज के अवसर पर मशोबरा ब्लाॅक के पीरन में जुन्गा देवता के नाम पर अतीत से मनाए माने जाने वाला मेला वीरवार को सम्पन्न हुआ। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय लोगों द्वारा निकाली गई शोभा यात्रा अर्थात जातर हजारों लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। मेले में पूजा कला मंच तारादेवी के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक पहाड़ी गीत गाकर मेले में आए लोगों का भरपूर मनोरजंन किया गया।

इस मौके पर प्रसिद्ध लोकगायिका बिमला ने अपनी सुरीली आवाज में सिरमौर का प्रसिद्ध गीत “ऐसी मूजरे जोगी जवाना बे छेड़ू चोजोरी गोरखीय” सुनाकर मेले में लोगों को नाचने पर मजबूर कर दिया। इसी प्रकार रमेश और रीता शर्मा द्वारा अपनी सुरीली आवाज में कांगड़ी प्रसिद्ध लोकगीत “लिख-लिख चिट्ठियां मैं भेजा बलोचा हो” गाकर सीमा पर डटे वीर जवानों को याद किया।

कार्यक्रम का आगाज मंच की कलाकार रूकमणी देवी, निशा बाला और रीता शर्मा ने पहाड़ी गीत “करी लेनी करी लेनी पहाड़ री सैर” सुनाकर किया गया। टीम प्रभारी रमेश चंद्र द्वारा पारंपरिक झूरी, गंगी सुनाकर लोगों को अतीत में गाए जाने वाले गीतों बारे जानकारी दी गई। मंच के कलाकारों द्वारा नशे पर हास्य लघु नाटिका शराबी प्रस्तुत करके जहां लोगों को नशे के दुष्प्रभाव बारे जागरूक किया, वहीं पर कलाकारों द्वारा हास्य रस पर व्यंग्य करते लोगों को हंसाकर लोटपोट कर दिया।

इसी प्रकार स्थानीय प्रसिद्ध कलाकार रामलाल वर्मा ने स्थानीय देवता जुन्गा पर पहाड़ी गीत सुनाकर और सुनील वर्मा ने पारंपरिक गीत बामणा रे छोरूआ गाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। हरमोनियम पर दिग्विजय सिंह, ढोलक पर राजेश कुमार के अतिरिक्त हरि शर्मा, उदित तथा रमेश चंद्र द्वारा मंच का सफल संचालन करके लोगों को बांधे रखा। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व पंचायत प्रधान अतर सिंह ठाकुर ने कहा कि भैयादूज पर पीरन में पीठासीन देवता जुन्गा के नाम पर कालांतर से मेला आयोजित किया जाता है।

जिसमें सबसे पहले 22 टीका के स्थान पर स्थानीय देवता के गुर से मेले की इजाजत ली जाती है। तत्पश्चात मेला आरंभ होता है। गांव के वरिष्ठ नागरिक दया राम वर्मा का कहना है कि इस प्राचीन मेले को देखने दूर-दूर से लोग आते है। गांव की विवाहित बेटियां भी भैयादूज पर अपने कुलदेवता का आर्शिवाद पाने के लिए मायके आती है। इससे पहले स्थानीय लोगों द्वारा ढोल नगाड़ों व शहनाई की धुन पर शोभा यात्रा निकाली गई जोकि 22 टीका स्थान जुब्बड़ से होती हुई ठौड़ माता के मंदिर में संपन हुई।