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कचरे से संसाधन तक की यात्रा / रिकांगपिओ में स्वच्छता का एक नया अध्याय

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 4 Sep 2025 • 1 Min Read

किन्नौर जिला प्रशासन और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ने स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। रिकांगपिओ में कचरे को संसाधन में बदलने की यह यात्रा अब जिले को देश का स्वच्छ जिला बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

रिकांगपिओ

स्वच्छता की नई पहल
साडा ने 19 उपमोहलों और 7 पंचायतों में करीब 7,850 घरों, कार्यालयों और प्रतिष्ठानों से रोज़ाना 1 से 1.5 टन कचरे का सफल प्रबंधन शुरू किया है। 80 से 90 प्रतिशत कचरे का संग्रह डोर-टू-डोर प्रणाली से होता है। हीलिंग हिमालयाज़ फाउंडेशन और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से कचरे के पृथक्करण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिल रहा है।

पोवारी प्लांट से संसाधन पुनर्प्राप्ति
पोवारी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र और सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा स्थापित की गई है। अप्रैल से अगस्त 2025 तक 25.95 टन कचरा प्लांट तक पहुंचा, जिसमें से 23.91 टन का प्रसंस्करण हुआ और 17.71 टन पुनर्चक्रण योग्य सामग्री बाजार में बेची गई। इससे न केवल पर्यावरणीय दबाव कम हुआ बल्कि राजस्व में भी वृद्धि हुई।

प्लास्टिक और ई-कचरे पर नियंत्रण
हर दिन 80 से 100 किलो प्लास्टिक संग्रहित कर पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाता है। साथ ही ई-कचरे के लिए अलग केंद्र स्थापित किया गया है। अविक्रय कचरे जैसे थर्माकोल और कम मूल्य के प्लास्टिक को शिमला के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में भेजने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

चुनौतियां और समाधान
डीसी डॉ. अमित कुमार शर्मा ने स्वीकार किया कि शहरी स्थानीय निकाय की अनुपस्थिति और अनियोजित कचरा शेड जैसी समस्याएं चुनौतियां हैं। इसके बावजूद सीसीटीवी कैमरों और सख्त निगरानी से व्यवस्था मजबूत हो रही है। शीघ्र ही नई नीति बनाकर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

रिकांगपिओ में साडा की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पहल ने यह दिखा दिया है कि इच्छाशक्ति और संगठनात्मक सहयोग से स्वच्छता और संसाधन पुनर्प्राप्ति दोनों संभव हैं। अब तक 23.91 टन कचरे का प्रसंस्करण और 17.71 टन पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं की बिक्री इस अभियान की बड़ी उपलब्धि है।