कृषि विभाग ने गेहूं बीज पर सब्सिडी 5 रुपये घटाई, किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक भार
शिमला
शिमला: प्रदेश के किसानों को इस रबी सीजन में गेहूं का बीज खरीदना अब महंगा पड़ेगा। कृषि विभाग ने गेहूं के बीज पर मिलने वाली सब्सिडी में 5 रुपये प्रति किलोग्राम की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद, किसानों को बीज खरीदने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी, जिसका सीधा असर उनकी खेती की लागत पर पड़ेगा।
कटौती और नए दाम
बीते साल तक किसानों को गेहूं के बीज पर 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सब्सिडी दी जा रही थी। विभाग के नए निर्देशानुसार, अब यह सब्सिडी घटाकर 10 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है
और अब कृषि विभाग के सेल सेंटरों पर किसानों को नए, कम सब्सिडी वाले दाम पर ही बीज उपलब्ध होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न जिलों में बीज के दाम को लेकर चल रहे विवाद को खत्म करते हुए अब सभी जगहों पर किसानों से एक ही दाम वसूले जाएंगे।
बुआई और वितरण की स्थिति
प्रदेश में 225 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है और अधिकांश किसान कृषि विक्रय केंद्रों से ही बीज लेते हैं। कृषि विभाग ने इस रबी सीजन के लिए सभी जिलों को कुल 85 हजार क्विंटल गेहूं का बीज उपलब्ध करवाया है।
गेहूं की बुआई मुख्य रूप से ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, सोलन और हमीरपुर जिलों में की जाती है। मैदानी इलाकों के किसान अलग-अलग किस्मों की गेहूं फसलें उगाते हैं और उनका रुझान गेहूं की बिजाई को लेकर अधिक होता है।
किसानों पर प्रभाव और विविधीकरण
विशेषज्ञों का कहना है कि सब्सिडी कम होने से इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक लागत पर पड़ेगा, खासकर उन किसानों पर जो मक्की कीऐ अपेक्षा गेहूं की खेती ज्यादा तादाद में कर रहे हैं। हालांकि, प्रदेश के कई क्षेत्रों में फसलों के विविधीकरण (Crop Diversification) के तहत किसान अब नकदी फसलों, जैसे सब्जियों की खेती, की ओर भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।