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खेत्री स्वां नदी प्रवाहित करना बना आस्था का केंद्र, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

PRIYANKA THAKUR 28 Mar 2026 Edited 28 Mar 1 min read

Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल

रामनवमी के पावन पर्व पर स्वां नदी तट पर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ा और पूरा क्षेत्र भक्ति में डूब गया। नौ दिनों की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने खेत्री, माता की प्रतिमाओं और ज्योत का विधि-विधान से विसर्जन किया। भंडारों और सेवा कार्यों के साथ यह आयोजन सामाजिक एकता और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण बन गया।

ऊना

उप-मंडल अम्ब के अंतर्गत आने वाले चुरूड़ू ,लोहारली क्षेत्र में रामनवमी के पावन पर्व पर स्वां नदी का तट आस्था, श्रद्धा और भक्ति का भव्य संगम बन गया। चैत्र नवरात्रि के आठ दिनों तक विधि-विधान से व्रत, पूजन और ज्योत स्थापित करने के बाद नौवें दिन श्रद्धालुओं ने पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ खेत्री, माता की प्रतिमाओं और ज्योत का विसर्जन किया। इस दौरान सुबह से ही नदी तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। और देखते ही देखते हजारों की संख्या में भक्तजन यहां एकत्रित हो गए।

दूर-दराज के गांवों और कस्बों से पहुंचे श्रद्धालु माता रानी के जयकारों के साथ नदी किनारे पहुंचे। वातावरण भक्तिमय हो गया।“जय माता दी” के उद्घोष से गूंज उठा। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। नवरात्रि के दौरान रखे गए व्रतों और पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालुओं ने बहते जल में माता का विसर्जन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

इस पावन अवसर पर स्थानीय समाजसेवी संगठनों और ग्रामीणों द्वारा सेवा भाव का अनूठा उदाहरण भी देखने को मिला। कई स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन और प्रसाद की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर सेवा करने वालों का आभार व्यक्त किया। भंडारों में लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग दिया, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती नजर आई। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

विसर्जन के पश्चात श्रद्धालुओं ने माता रानी से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सदा बनी रहे और आने वाला समय भी खुशियों, समृद्धि और सुख-शांति से परिपूर्ण हो। “अगले बरस तू जल्दी आ” की कामना के साथ श्रद्धालु भावुक मन से अपने-अपने घरों की ओर लौटते नजर आए।
रामनवमी के इस पावन अवसर पर सतलुज–स्वां नदी का तट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि यह आयोजन सामाजिक सद्भाव, सेवा भावना और सामूहिक श्रद्धा का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर गया।