चैत्र नवरात्र पर श्रीमद् भागवत कथा महापुराण साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ का आयोजन
HNN/ऊना/वीरेंद्र बन्याल
उप तहसील जोल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कठोह के उप-गांव ठकां अमरोह में चैत्र नवरात्रों के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा महापुराण साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ का आयोजन रिटायर्ड कर्नल तरसेम राणा के निवास स्थान पर किया गया है।
वहीं श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित रत्न चंद शर्मा ने कहा कि विनु परतीति होई नहीं प्रीति अर्थात महात्म्य में ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीवी नहीं होता, अस्थाई हो जाता है। धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मसात कर लें तो जीवन से सारी उलझने समाप्त हो जाएगी।
द्रौपदी कुंती महाभागवत नारी है। कुंती स्तुति को विस्तार पूर्वक समझाते हुए परीक्षित जन्म एवं सुखदेव आगमन गोकर्ण की कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है वह अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य पर देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए पंडित रत्न चंद शर्मा ने कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद् भागवत कथा सुननी चाहिए।
भागवत श्रवण मनुष्य के संपूर्ण क्लेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने अच्छे और बुरे कार्यों के बारे में विस्तार से वृतांत समझाया और धुंधकारी द्वारा एकाग्रता पूर्ण भागवत कथा श्रवण से प्रेत मुक्ति बताई। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को निर्णय करना होता है कि उसे किस राह चलना चाहिए।
छल और छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। छल रूपी खटाई से दूध हमेशा फटेगा। छलचित्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते हैं। निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है। छल छिद्र रहित और निर्मल मन भक्ति के लिए जरूरी है। कथा के पहले दिन विराट रूप का वर्णन किया गया। इसे सुन श्रद्धालु भाव -बिभोर हो गए। भजन गीत व संगीत पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे।