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जलाशय मछलियों के लिए MSP लागू, रॉयल्टी 1 प्रतिशत, मछुआरों को बड़ी राहत

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने और मछुआरों की आय सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। जलाशय मछलियों के लिए पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया गया है और रॉयल्टी दर को घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। इन फैसलों से मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी।

शिमला

मछलियों के लिए पहली बार MSP लागू

राज्य के इतिहास में पहली बार सरकार ने जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। मछलियों का MSP 100 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है, जिससे मछुआरों को कीमतों में गिरावट से सुरक्षा मिलेगी। यदि नीलामी मूल्य इससे कम रहता है तो सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी देगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभ सीधे मछुआरों के खातों में पहुंचेगा।

रॉयल्टी में बड़ी कटौती से राहत

सरकार ने जलाशयों से प्राप्त मछलियों पर लगने वाली रॉयल्टी दर को घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 15 प्रतिशत से घटकर 7.5 प्रतिशत की गई थी। इस निर्णय से प्रदेश के 6,000 से अधिक मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका आर्थिक बोझ कम होगा। यह कदम मछुआरा समुदाय के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य मत्स्य क्षेत्र को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना है।

जलाशयों में बढ़ा उत्पादन

प्रदेश के प्रमुख जलाशयों—गोबिंद सागर, पोंग डैम, रंजीत सागर, चमेरा और कोल डैम—में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में जहां उत्पादन 549.35 मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 818.02 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उन्नत फिंगरलिंग्स के स्टॉकिंग जैसे प्रयासों से यह वृद्धि संभव हुई है। इससे मत्स्य क्षेत्र में विकास की गति तेज हुई है।

मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

इन नीतिगत फैसलों से जलाशय मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और मछली पकड़ने की सतत पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार मत्स्य अवसंरचना के विस्तार, विपणन व्यवस्था को मजबूत करने और मछुआरों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है। इससे ग्रामीण रोजगार में भी वृद्धि होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

कुल उत्पादन में भी हुई बढ़ोतरी

राज्य में कुल मछली उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में जहां उत्पादन 19,019 मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि मत्स्य क्षेत्र में सरकार की नीतियों का सकारात्मक असर पड़ रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

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