जल्द खत्म होगा आइस स्केटर्स का इंतजार, शिमला के रिंक में शुरू होगा रोमांच का खेल
HNN/ शिमला
हिमाचल की राजधानी शिमला में एशिया के इकलौते ओपन एयर स्केटिंग रिंक में जल्द ही स्केटिंग शुरू होने वाली है। ऐसे में लंबे समय से यहां स्केटिंग करने का इंतजार कर रहे सैलानियों सहित स्थानीय लोगों के लिए यह राहत की खबर है। हालाँकि, रिंक में घास व मैदान में गड्ढे पड़ जाने के चलते इसकी साफ-सफाई का कार्य शुरू किया गया है। 30 नवंबर तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा जिसके बाद दिसंबर के पहले सप्ताह में ही यहां लोग स्केटिंग का लुफ्त उठा सकेंगे।
आइस स्केटिंग रिंक में पिछले साल जहाँ 58 सेशन हुए थे वहीँ, इस साल भी यहाँ स्केटिंग के सेशन शुरू होना प्रस्तावित हुआ है। वहीँ, आइस स्केटिंग क्लब शिमला इस सीजन में स्केटिंग शुल्क नहीं बढ़ाएगा। पुरानी दरों पर ही युवा रिंक में स्केटिंग कर सकेंगे। बता दें कि साउथ ईस्ट एशिया का पहला सेमी नेचुरल आइस स्केटिंग रिंक शिमला के लक्कड़ बाजार बस स्टैंड के पास स्थित है। ब्रिटिशकाल से अब तक इस रिंक में प्राकृतिक तरीके से ही बर्फ जमाई जाती है।
नवंबर माह में जब तापमान में गिरावट आती है तो रिंक में पानी छिड़का जाता है, जिसे प्राकृतिक तरीके से जमने दिया जाता है और जब बर्फ की परत मैदान पर जमकर तैयार हो जाती है तो उस पर स्केटिंग की जाती है। उधर, रिंक के संगठन सचिव पंकज प्रभाकर का कहना है कि आइस स्केटिंग रिंक में स्केटिंग के सेशन मौसम पर निर्भर करते है। मौसम का साथ रहा तो रिंक की सफाई के बाद यहाँ बर्फ जमाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में दिसंबर के पहले सप्ताह से स्केटिंग सेशन शुरू होने की संभावना है।
आइस स्केटिंग रिंक का इतिहास, 1920 में हुई थी शुरू
शिमला में 1920 में आइस स्केटिंग रिंक की शुरुआत हुई थी। जहां आज स्केटिंग रिंक है, वहां कभी टेनिस कोर्ट हुआ करता था। ब्लेस्सिंगटन नामक एक अंग्रेज को स्केटिंग शुरू करने का श्रेय जाता है। इसकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। ब्लेस्सिंगटन ने देखा कि सर्दियों में टेनिस कोर्ट के नलके और इसके आसपास का पानी जमा है।
इसको देखते हुए ब्लेस्सिंगटन ने टेनिस कोर्ट को पानी से भर दिया जो पूरी तरह से जम गया। इसको देखकर ब्लेस्सिंगटन की खुशी का ठिकाना न रहा, उन्होंने इसको 1920 में स्केटिंग रिंक में बदल दिया और आइस स्केटिंग क्लब की स्थापना की। शिमला आइस स्केटिंग क्लब देश का पहला स्केटिंग क्लब था। दक्षिणी पूर्वी एशिया का अपनी तरह का पहला क्लब है जहां इस तरह प्राकृतिक तौर पर बर्फ जमाई जाती है।