कड़ी मेहनत और सरकारी योजनाओं से पाया आर्थिक समृद्धि का मुकाम
ऊना जिले के गोंदपुर बनेहड़ा गांव के जीवन लाल ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी सफलता प्राप्त कर सकता है। पारंपरिक कृषि से अलग हटकर उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछली पालन को अपनाया और आज एक सफल मत्स्य उद्यमी के रूप में पहचान बना चुके हैं।
सिर्फ दो वर्षों के भीतर, उन्होंने 2.2 लाख रुपये के शुरुआती मुनाफे से आगे बढ़ते हुए इस वर्ष 7.6 लाख रुपये तक के लाभ की उम्मीद की है। उनकी यह सफलता न केवल उनकी खुद की आर्थिक स्थिति में सुधार लाई है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी एक प्रेरणादायक कहानी बन गई है।
सरकारी योजनाओं से मिला सहयोग , मुख्यमंत्री सुक्खू सरकार का मत्स्य पालन को बढ़ावा
हिमाचल प्रदेश के मत्स्य पालन विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार मत्स्य पालन को स्वरोजगार का साधन बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें –
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 40% से 60% तक की सब्सिडी दी जा रही है।
- मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना, जिसमें किसानों को 80% तक की सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
कैसे हुई सफलता की शुरुआत?
जीवन लाल ने वर्ष 2023-24 में 0.3450 हेक्टेयर भूमि पर मछली पालन की शुरुआत की। उन्हें सरकार से 1.71 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने मत्स्य पालन की बुनियादी संरचना तैयार की।
सही रणनीति और परिश्रम से उन्होंने पहली ही फसल में 2.2 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया। इस सफलता के बाद उन्होंने मत्स्य पालन का विस्तार करने का निर्णय लिया और 2024-25 में अतिरिक्त तालाब किराए पर लेकर उत्पादन बढ़ाया।
मत्स्य पालन में नवाचार और बढ़ता रोजगार
जीवन लाल ने परंपरागत तरीकों की बजाय नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाया । उन्होंने –
- छोटे लेकिन प्रभावी तालाबों का निर्माण किया, जिन्हें आसानी से संचालित किया जा सकता है।
- मिश्रित सेमी-इंटेंसिव कार्प कल्चर तकनीक अपनाई, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई।
- बाजार से महंगा चारा खरीदने की बजाय, बची हुई दालों और सोयाबीन न्यूट्री का मिश्रण बनाकर मछलियों को खिलाया, जिससे लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा।
उनके इस प्रयास से 72 अतिरिक्त मानव-दिवसों का रोजगार सृजित हुआ और उन्होंने एक व्यक्ति को स्थायी रोजगार भी प्रदान किया।
मत्स्य पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हिमाचल
जीवन लाल की सफलता यह दर्शाती है कि हिमाचल प्रदेश में मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। उनकी कहानी उन सभी किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते हैं।
मत्स्य पालन, न केवल आर्थिक लाभदायक है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है। सरकार की योजनाओं और सही मार्गदर्शन के साथ, कोई भी व्यक्ति इस क्षेत्र में सफलता की नई ऊंचाइयां छू सकता है।

