जोलना गांव के किसानों को मिली सिंचाई सुविधा , सौर ऊर्जा से संचालित योजना ने बदली कृषि की दिशा
चंबा
56 बीघा भूमि को मिला सिंचाई का लाभ, नकदी फसलों की ओर बढ़े किसान
सिंचाई सुविधा से बदला किसानों का नजरिया
चंबा जिला के भटियात विधानसभा क्षेत्र के जोलना-2 गांव में हाल ही में स्थापित सौर ऊर्जा चालित उठाऊ सिंचाई योजना ने स्थानीय किसानों की कृषि पद्धतियों में बड़ा बदलाव लाया है। अब तक पूरी तरह वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसानों को अब नियमित सिंचाई सुविधा मिल रही है, जिससे उनकी गेहूं की फसल में भी इस बार उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। यह योजना लगभग 15 प्रगतिशील किसानों को लाभ दे रही है, जिन्होंने अब नकदी फसलों की खेती की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
सरकार व विभागीय समन्वय से संभव हुआ परिवर्तन
कृषि विभाग के भू संरक्षण अनुभाग व जल शक्ति विभाग की संयुक्त कोशिशों से जिले के कई गांवों में सिंचाई सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। इसी कड़ी में जोलना-2 गांव में 14 लाख 30 हजार रुपये की लागत से सौर ऊर्जा चालित उठाऊ सिंचाई योजना स्थापित की गई। इस योजना के तहत नाबदान, 240 मीटर पाइपलाइन, 18000 लीटर क्षमता वाला सिंचाई टैंक, 10 हॉर्स पॉवर की मोटर, सौर पैनल और स्प्रिंकलर प्रणाली लगाई गई, जिससे पूरे गांव की 56 बीघा भूमि को सुनिश्चित सिंचाई के दायरे में लाया गया है।
अब नकदी फसलों पर फोकस करेंगे किसान
इस योजना से लाभान्वित हुए किसानों – रविंद्र सिंह, भारत भूषण, सादिक, बालक राम, सिमलो देवी, सुधीर सिंह, सलीमा, करनैल सिंह, मक्खन, आलमदीन, महेंद्र सिंह, मरीद, गुगड, सुरेंद्र सिंह व मसूमा – का कहना है कि अब वे पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों और अन्य नकदी फसलों की खेती करने की योजना बना रहे हैं।
पिछड़े गांव में आई नई उम्मीद की किरण
जोलना-2 गांव, जो तहसील सिहुंता का एक पिछड़ा और दूरदराज क्षेत्र है, अब सिंचाई सुविधा के चलते विकास की नई राह पर है। अतीत में यहां सूखे के मौसम में किसानों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह योजना उनकी कृषि आय को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
तकनीकी विवरण और योजना की प्रक्रिया
उपमंडलीय भू संरक्षण अधिकारी बनीखेत, चंद्र शेखर ने बताया कि यह योजना पिछड़ा वर्ग उप योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में स्वीकृत की गई थी। सिंचाई टैंक व पाइपलाइन पर लगभग 8.8 लाख रुपये, सौर ऊर्जा संयंत्र पर 2.5 लाख रुपये और स्प्रिंकलर प्रणाली पर लगभग 2.9 लाख रुपये खर्च किए गए। इस तकनीकी सुविधा ने गांव में सिंचाई की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की है।
