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नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने में देरी पर सियासत तेज, सरकार से रोडमैप की मांग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 10 Hours Ago • 1 Min Read

Himachalnow / सिरमौर

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है। भाजपा विधायक एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रीना कश्यप ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए अधिनियम के क्रियान्वयन में देरी पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार से इसे लागू करने के लिए स्पष्ट रोडमैप की मांग की है।

सिरमौर

अधिनियम को लेकर बढ़ी सियासत

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है। भाजपा विधायक एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रीना कश्यप ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए अधिनियम के क्रियान्वयन में देरी पर सवाल खड़े किए हैं।

33 प्रतिशत आरक्षण पर उठे सवाल

रीना कश्यप ने कहा कि सितंबर 2023 में पारित इस संवैधानिक संशोधन से लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन प्रदेश स्तर पर इसे लागू करने को लेकर कोई स्पष्ट पहल सामने नहीं आ रही है।

महिला मतदाताओं की भागीदारी पर जोर

उन्होंने कहा कि देश में करीब 47 करोड़ महिला मतदाता हैं और कई चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा है, लेकिन इसके बावजूद निर्णय लेने वाले मंचों पर उनका प्रतिनिधित्व सीमित है।

पंचायत स्तर पर महिलाओं की भूमिका

रीना कश्यप ने कहा कि पंचायत स्तर पर करीब 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व यह साबित कर चुका है कि महिलाओं की भागीदारी से शासन अधिक जवाबदेह और जन-केंद्रित बनता है। ऐसे में अब उन्हें उच्च स्तर की राजनीति में भी समान अवसर मिलना चाहिए।

केंद्र की योजनाओं का दिया हवाला

उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, मुद्रा योजना और जनधन खातों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया गया है, अब अगला कदम उन्हें नीति निर्माण में भागीदारी देना है।

सरकार से रोडमैप की मांग

रीना कश्यप ने कांग्रेस सरकार से मांग की कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका प्रभावी क्रियान्वयन ही महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करेगा।

अधिकारों से वंचित होने की आशंका

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखने जैसा होगा।