नाहन रियासत को महामारी से बचने के लिए इंद्र सिंह गुरुंग ने शुरू की थी मां संसारी देवी की पूजा
नाहन/जलापड़ी
ऐतिहासिक नाहन शहर के जलापड़ी स्थित माता संसारी मंदिर में रविवार को गोरखा समुदाय की अटूट आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। समुदाय के लोगों ने बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मां संसारी देवी की आराधना की, साथ ही कोटली, मझौली और शंभुवाला में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसमें विश्व में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई।
आज रविवार को इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन में सिरमौर गोरखा सभा के प्रधान खेम बहादुर, योगेंद्र गुरंग, किरण राणा, सूरज राणा, अनिल ठाकुर, किरण बहादुर, रवि राणा, जित्ती थापा, सुशील बहादुर, निमो ठाकुर, शकुंतला थापा, जितेंद्र थापा सहित बड़ी संख्या में गोरखा समुदाय के परिवारों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
पूजा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के बीच मां संसारी देवी का पवित्र भोग वितरित किया गया।इस अवसर पर प्रधान खेम बहादुर ने कहा कि मां संसारी देवी की कृपा सदैव समुदाय पर बनी रहे और विश्व में शांति स्थापित हो।
योगेंद्र गुरंग ने इस पूजा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह परंपरा हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है।मां संसारी देवी की पूजा का इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है। वर्ष 1919 में जब स्पेनिश फ्लू की महामारी फैली थी, तब नाहन क्षेत्र को बचाने के लिए सैनिक इन्द्र सिंह गुरंग ने इस मंदिर की स्थापना की थी।
तब से, हर वर्ष ज्येष्ठ माह के पहले रविवार को यह पूजा आयोजित की जाती है।सिरमौर गोरखा सभा के युवा संयोजक अंकुर थापा ने बताया कि जलापड़ी मंदिर समुदाय की गहरी आस्था का केंद्र है और युवा पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है।
आज की इस विशेष पूजा में किरण राणा सूरज राणा अनिल ठाकुर, रितिक, जित्ती थापा, जितेंद्र शाही , निमो ठाकुर , करण बहादुर , सूरजराणा आदि ने मिलकर मां संसारी देवी से विश्व को महामारी और अन्य संकटों से बचाने की प्रार्थना की।
यह उल्लेखनीय है कि जिस प्रकार अतीत में मां संसारी देवी ने नाहन क्षेत्र की रक्षा की थी, उसी विश्वास के साथ आज भी समुदाय उनकी शरण में है। यह पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि समुदाय की एकता और अटूट विश्वास का भी प्रतीक है।

