नाहन मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं का संकट गहराया, जांच और उपचार सेवाएं प्रभावित होने से मरीज परेशान
नाहन मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण कई जरूरी जांच सेवाएं प्रभावित बताई जा रही हैं।
नाहन
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मेडिकल कॉलेज में बुनियादी सेवाओं पर सवाल
जिला सिरमौर के नाहन स्थित डॉ. वाई.एस. परमार मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बावजूद यहां बुनियादी जांच और उपचार सेवाएं प्रभावित बताई जा रही हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अल्ट्रासाउंड और डेंटल एक्स-रे सेवाएं प्रभावित
जानकारी के अनुसार संस्थान में चिकित्सकों की कमी के कारण अल्ट्रासाउंड सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें जांच के लिए निजी केंद्रों या अन्य जिलों का रुख करना पड़ रहा है। वहीं डिजिटल एक्स-रे मशीन उपलब्ध होने के बावजूद दंत एक्स-रे सेवाएं भी बाधित हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और उपकरणों की कमी
बताया जा रहा है कि गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक उपकरणों की भी कमी बनी हुई है। ऐसे में क्रिटिकल केस आने पर रेफर करने की नौबत आ जाती है। इससे समय पर उपचार न मिलने की चिंता भी बढ़ रही है।
प्रिंसिपल ने मानी डॉक्टरों की कमी
मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल संगीत ढिल्लों ने स्वीकार किया है कि डॉक्टरों की कमी प्रमुख चुनौती है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि विशेषज्ञों की नियुक्ति और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आवश्यक है, ताकि सेवाओं में सुधार लाया जा सके।
जर्जर भवन और आधारभूत ढांचे पर भी सवाल
करीब आठ दशक पुरानी जर्जर इमारत में संचालित हो रहे इस मेडिकल कॉलेज की आधारभूत संरचना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद अपेक्षा थी कि जिला स्तर पर बेहतर और संपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन वर्तमान स्थिति निराशाजनक है। कुछ लोग पुराने जोनल अस्पताल मॉडल को ही अधिक प्रभावी बताते हुए उसकी बहाली की मांग भी उठा रहे हैं।
एमबीबीएस विद्यार्थियों के प्रशिक्षण पर भी असर की आशंका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते चिकित्सकों की नियुक्ति, उपकरणों की उपलब्धता और आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर न केवल मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर बल्कि यहां अध्ययनरत एमबीबीएस विद्यार्थियों के प्रशिक्षण पर भी पड़ सकता है।
सरकार और विभाग से ठोस कदमों की उम्मीद
अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस महत्वपूर्ण संस्थान को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
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