नाहन:
शिमला के आईजीएमसी में डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट की घटना के विरोध में प्रदेशभर में चल रहे गतिरोध के बीच नाहन मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सुचारू बनी रहीं।

जिला मुख्यालय स्थित इस प्रमुख अस्पताल में डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ड्यूटी दी, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिली। हालांकि, कुछ सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स (SRAs) अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहे, लेकिन इसका असर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और अन्य सेवाओं पर नहीं पड़ा।
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मेडिकल कॉलेज की लगभग सभी ओपीडी में डॉक्टर मौजूद रहे और मरीजों की जांच की गई। आपातकालीन सेवाएं भी सामान्य रूप से चलती रहीं और इमरजेंसी में डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की गई।
मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल संगीता ढिल्लों ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रबंधन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों द्वारा हड़ताल को लेकर उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, इसके बावजूद अस्पताल में कामकाज प्रभावित नहीं होने दिया गया।
दूसरी ओर, शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने आईजीएमसी प्रकरण में सरकार द्वारा डॉक्टर के टर्मिनेशन के फैसले को सही ठहराया है। स्थानीय निवासी नरेन्द्र तोमर का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में एक डॉक्टर द्वारा मरीज के साथ मारपीट किया जाना सर्विस रूल्स के खिलाफ है और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।
गौरतलब है कि जहां जिला के पांवटा साहिब जैसे अन्य स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रहीं, वहीं नाहन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने मुस्तैदी दिखाते हुए अपनी सेवाएं जारी रखीं। हालांकि, दूर-दराज से आए कुछ मरीज हड़ताल की खबरों के कारण असमंजस में दिखे, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उन्हें ओपीडी में इलाज मिल सका।
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