पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास की राह दिखा रही राजीव गांधी वन संवर्धन योजना
हिमाचल सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि ग्रामीणों को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ा रही है। इस योजना का लक्ष्य अनुपयोगी वनों को हरा-भरा करना और साथ ही स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना है।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
जनभागीदारी से बढ़ेगा हरित आवरण
प्रदेशभर में इस योजना को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। ऊना जिले में भी इसका क्रियान्वयन तेजी से आगे बढ़ रहा है। डीएफओ ऊना सुशील राणा के अनुसार महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य सामुदायिक संगठनों को वनीकरण से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक समूह को 1 से 5 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण और पांच वर्षों तक देखरेख की जिम्मेदारी दी जाएगी।
समूहों को वित्तीय प्रोत्साहन
इस योजना के तहत प्रति हेक्टेयर वृक्षारोपण पर समूहों को 1.20 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पौधों की जीवित रहने की दर पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। यदि 50 प्रतिशत से अधिक पौधे सुरक्षित रहते हैं, तो समूह को 1 लाख रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। ऊना जिले के सभी वन क्षेत्रों में पौधारोपण जारी है और क्षतिग्रस्त पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए जा रहे हैं।
प्रशासन की सक्रिय भूमिका
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि जिला प्रशासन प्रदेश सरकार की सोच के अनुरूप योजना को धरातल पर उतार रहा है। युवाओं और समूहों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर आर्थिक अवसर मिल सकें।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की दृष्टि
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस योजना की शुरुआत इस सोच के साथ की कि यह केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित न रहकर ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सशक्तिकरण की राह खोले। वहीं, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन स्थापित कर सतत विकास की नींव रखना है।