अध्यक्ष अनिंदर सिंह पंधेर बोले- बुलेट ट्रेन पर अरबों खर्च कर सकती है सरकार, तो पांवटा साहिब से भेदभाव क्यों?
पांवटा साहिब:
पांवटा साहिब रेल संघर्ष समिति (पीएसआरएसएस) ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा संसद में पांवटा साहिब-जगाधरी रेल लाइन परियोजना को रद्द करने की घोषणा पर कड़ा ऐतराज जताया है। समिति ने इस फैसले को जनविरोधी और भेदभावपूर्ण करार देते हुए सहारनपुर लिंक के लिए नए सर्वे की मांग उठाई है।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष अनिंदर सिंह पंधेर (नॉटी) ने कहा कि सरकार का यह तर्क देना कि परियोजना घाटे वाली है, पूरी तरह तर्कहीन है। उन्होंने कहा कि भारत एक कल्याणकारी राज्य है जहाँ रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सेवाएं लाभ-हानि के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के तहत दी जाती हैं।
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भारतीय रेलवे खुद यात्री सेवाओं में भारी घाटा उठाता है, जिसकी भरपाई माल ढुलाई से की जाती है। ऐसे में केवल पांवटा साहिब परियोजना को घाटे का हवाला देकर रोकना न्यायसंगत नहीं है।
पंधेर ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसी महंगी परियोजनाओं पर 1.08 लाख करोड़ रुपये खर्च कर सकती है, तो पांवटा साहिब जैसे औद्योगिक और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्र को रेलवे से वंचित क्यों रखा जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि पांवटा साहिब को सहारनपुर जैसे व्यस्त जंक्शन से जोड़ने के लिए तत्काल नया सर्वे करवाया जाए, जिससे यातायात और राजस्व दोनों में वृद्धि होगी।
समिति ने स्पष्ट किया कि पांवटा साहिब गुरुद्वारा साहिब की तीर्थयात्रा और यहाँ के उद्योगों की कनेक्टिविटी के लिए यह रेल लिंक संजीवनी साबित होगा। यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो समिति शांतिपूर्ण विरोध और कानूनी रास्तों के माध्यम से अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
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