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पांवटा साहिब में नकली दवा रैकेट का भंडाफोड़: मानव जीवन से खिलवाड़ करने वाले गिरोह पर बड़ी कार्रवाई

Shailesh Saini | 6 जुलाई 2025 at 10:06 pm

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उत्तराखंड से जुड़े तार, सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर अमल

हिमाचल नाऊ न्यूज़ पांवटा साहिब

हिमाचल प्रदेश में नकली दवाओं के अवैध कारोबार पर एक बड़ी चोट पड़ी है। राज्य के दवा नियंत्रण प्रशासन और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एक संयुक्त अभियान में नकली सक्रिय औषधि घटकों (APIs) की आपूर्ति करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है।

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इस महत्वपूर्ण कार्रवाई से प्रदेश में नकली दवाओं के नेटवर्क को गहरा झटका लगा है, जो सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा था।

गुपचुप मिली पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर, अधिकारियों की टीम ने सिरमौर जिले के पांवटा साहिब बस स्टैंड के पास स्थित एक परिसर में अचानक छापा मारा। यह परिसर थोक दवा व्यापार के लिए वैध लाइसेंस की आड़ में नकली APIs का धंधा कर रहा था।

छापेमारी के दौरान, टीम ने बड़ी मात्रा में नकली थायोकॉल्चीकोसाइड (जो आमतौर पर मांसपेशियों की ऐंठन और सूजन में प्रयुक्त होती है) और एज़िथ्रोमाइसिन (एक महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक) बरामद किए। इन नकली घटकों का उपयोग गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जा रहा था, जिससे मरीजों के जीवन को सीधा खतरा था।

उत्तराखंड से जुड़े तार, सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर अमल

हिमाचल प्रदेश के दवा नियंत्रक, डॉ. मनीष कपूर ने इस मामले में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि परिसर का लाइसेंसधारी और मालिक जब्त किए गए नकली APIs की खरीद का कोई वैध बिल या रसीद पेश नहीं कर सका, जिसके बाद उसे तत्काल हिरासत में ले लिया गया है।

प्रारंभिक जांच में इस रैकेट के तार उत्तराखंड से भी जुड़े पाए गए हैं। इस संबंध में उत्तराखंड से दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आशंका है कि यह नेटवर्क अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय था और इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था। डॉ. कपूर ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।

डॉ. मनीष कपूर ने इस कार्रवाई को राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सीधा परिणाम बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “ऐसे असामाजिक तत्व जो इस प्रकार की घिनौनी हरकतों में लिप्त हैं, वे सीधे तौर पर मानव जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।

इनके खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत सबसे कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी और औषधि निरीक्षक को इस मामले की जांच में तेजी लाने और दोषियों के खिलाफ हरसंभव कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

दवा नियंत्रण प्रशासन, हिमाचल प्रदेश नागरिकों को सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और CDSCO तथा अन्य राज्यों की नियामक एजेंसियों के साथ मिलकर इस तरह की आपराधिक गतिविधियों को जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

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