पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाई हिमाचल की टेंशन, बागवानों पर मंडराया संकट
₹3 प्रति लीटर उछाल से ट्रांसपोर्ट महंगा, फल सीजन शुरू होते ही बढ़ी बागवानों की चिंता
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का असर अब सीधे आम लोगों की जेब और हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी ने प्रदेश में महंगाई की नई चिंता खड़ी कर दी है। खास तौर पर हिमाचल के बागवानी क्षेत्र में इस बढ़ोतरी को बड़े आर्थिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसका असर हिमाचल प्रदेश में भी साफ दिखाई दे रहा है। सिरमौर जिला के नाहन और पांवटा साहिब जैसे व्यापारिक क्षेत्रों में पेट्रोल की कीमतें ₹98 के करीब पहुंचने लगी हैं, जबकि डीजल भी ₹90 के पार निकल गया है।
फल सीजन शुरू, लेकिन बढ़ गई ढुलाई की टेंशन
प्रदेश में फलों का सीजन शुरू होते ही डीजल की कीमतों में उछाल ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। सेब, आड़ू, प्लम और अन्य फलों की ढुलाई अब पहले से कहीं अधिक महंगी पड़ने वाली है। पहाड़ी क्षेत्रों से मंडियों तक माल पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे बागवानों का मुनाफा सीधे प्रभावित होगा।
बागवानों का कहना है कि पहले ही मौसम की मार, मजदूरी और दवाइयों के बढ़ते दामों से लागत बढ़ चुकी है, ऐसे में डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट का बोझ और भारी पड़ जाएगा। कई क्षेत्रों में फल मंडियों तक पहुंचाने का खर्च इतना बढ़ सकता है कि छोटे बागवानों के लिए सीजन घाटे का सौदा बन जाए।
महंगाई की नई मार झेलने को तैयार रहे आम आदमी
ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर केवल बागवानी तक सीमित नहीं रहने वाला। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की वस्तुएं, फल-सब्जियां और निर्माण सामग्री तक महंगी हो सकती है। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में कीमतों का नया उछाल देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में डीजल की कीमत बढ़ना सीधे परिवहन लागत को प्रभावित करता है, क्योंकि यहां अधिकांश आपूर्ति सड़क मार्ग पर निर्भर करती है। यदि सरकार ने समय रहते माल ढुलाई दरों को नियंत्रित करने या राहत देने के कदम नहीं उठाए, तो इसका सबसे ज्यादा असर बागवानों और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।
मध्य पूर्व तनाव का असर हिमाचल तक
जानकारों के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसका असर अब भारत में ईंधन दरों पर दिखाई दे रहा है। हालांकि लोगों की नजर अब केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर टिकी है कि आने वाले दिनों में राहत मिलती है या महंगाई का यह दबाव और बढ़ेगा।
