प्रदेश में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के लिए शराब पीने वाले भी देंगे योगदान
शराब की बोतलों पर पहले से ही लगे हैं पंचायत, एम्बुलेंस, गोधन व दूध सेस
HNN/नाहन
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के लिए अब शराब पीने वाले भी अपना योगदान देंगे। हिमाचल प्रदेश सरकार ने दूध, एम्बुलेंस, गोधन विकास निधि के बाद शराब पर एक और नया सेस लगाया है। वित्तीय वर्ष 2024- 25 के लिए प्रदेश सरकार ने शराब पर पहली बार प्राकृतिक खेत उपकार लगाया है।
प्राकृतिक खेती सेस 2 से लेकर 5 रूपए तक निर्धारित किया गया है। हिमाचल प्रदेश में सबसे पहले उन पंचायत को पंचायत सेस शुरू किया था। जिन पंचायतों में शराब के ठेके खुले हैं। उसके बाद प्रदेश सरकार ने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के लिए प्रति बोतल 1 एंबुलेंस सेवा निधि कर लगाया। उसके बाद पूर्व भाजपा सरकार ने शराब पर आवारा पशुओं को पशुशाला में रखने के लिए गोधन विकास निधि के नाम से प्रति बोतल पर 2 रूपए 50 पैसे सेस लगाया।
फिर सरकार ने किसानों को दूध के अच्छे दाम मिले, इसके लिए 10 रूपए प्रति बोतल सेस लगाया गया। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने शराब सेस लगने में इजाफा करते हुए किसानों की मदद के उद्देश्य से पहली बार प्राकृतिक खेती सेस शुरू किया है। प्रदेश में 1 अप्रैल से देसी शराब पर 2 रूपए, अंग्रेजी शराब पर 5 रूपए तथा इंपोर्टेड शराब पर 5 रूपए प्राकृतिक खेती सेस शराब पीने वालों से लेना सरकार ने शुरू कर दिया है।
इसके अतिरिक्त राज्य कर एवं आबकारी विभाग शराब पर ईटीडी डेवलपमेंट फंड भी लेता है। जिसमें देसी शराब प्रति बोतल 1 रूपए 50 पैसे, अंग्रेजी शराब 1 रूपए 50 पैसे, बियर 1 रूपए 50 पैसे तथा इंपॉर्टेंट शराब 5 रूपए 50 पैसे सेस शामिल है।
हिमाचल में शराब की दुकान खोलने के लिए पहले पंचायतें एनओसी नहीं देती थी, फिर सरकार ने पंचायतों को 2 रूपए प्रति बोतल से शुरू किया, ताकि आसानी से एनओसी भी मिल जाए और इस धनराशि से पंचायत में विकास कार्य भी हो सके।