फायर सीजन में पहली बार वॉकी-टॉकी से निगरानी, 400 कर्मी तैनात, वन विभाग हाई अलर्ट
Himachalnow / नाहन
जिला सिरमौर में फायर सीजन के दौरान इस बार वन सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। पहली बार बिना नेटवर्क वाले वन क्षेत्रों में वॉकी-टॉकी के जरिए निगरानी और संचार व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि आग की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। 1 अप्रैल से शुरू हुए फायर सीजन को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में है।
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वॉकी-टॉकी से निगरानी की नई व्यवस्था
जिला सिरमौर में फायर सीजन के दौरान इस बार वन सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। पहली बार बिना नेटवर्क वाले वन क्षेत्रों में वॉकी-टॉकी के जरिए निगरानी और संचार व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि आग की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
फायर सीजन में विभाग एक्शन मोड में
1 अप्रैल से शुरू हुए फायर सीजन को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में है। विभाग ने सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और करीब 400 फॉरेस्ट गार्ड, वन मित्रों व अन्य स्टाफ को अलर्ट पर रखा गया है।
वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सख्त रणनीति
जिले में करीब 217 वन बीट और लगभग 1 लाख 25 हजार हेक्टेयर वन भूमि को आग से बचाने के लिए इस बार रणनीति को और सख्त किया गया है। डिवीजन स्तर पर विशेष प्रोसिजर लागू किए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण पर जोर
वन विभाग द्वारा जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों और पंचायतों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। कर्मचारियों के साथ बैठकों का दौर पूरा हो चुका है, जबकि वन मित्रों के साथ कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें आग से निपटने के लिए तैयार किया गया है। फील्ड स्तर पर फॉरेस्ट गार्ड और वन मित्रों के सहयोग से मॉक ड्रिल भी करवाई जा रही हैं।
आधुनिक संसाधनों पर होगी अहम बैठक
इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि वन संपदा को आग से बचाने के लिए प्रधान अरण्यपाल हिमाचल प्रदेश वन विभाग की एक अहम बैठक जल्द प्रस्तावित है। इस बैठक में फायर सेफ्टी के आधुनिक संसाधनों और नई तकनीकों को शामिल करने पर भी मंथन किया जाएगा।
अधिकारियों ने दी जानकारी
डीएफओ नाहन अवनी भूषण राय और डीएफओ पांवटा साहिब वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य फायर सीजन के दौरान वन संपदा को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाना है। इसके लिए हर स्तर पर सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
लापरवाही पर नहीं होगी कोई गुंजाइश
वन विभाग के इस सख्त रुख से साफ है कि इस बार जंगलों में आग की घटनाओं को लेकर कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।