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सील्ड रोड पर वाहनों की आवाजाही को लेकर अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन, बैठक के बाद समाप्त हुआ धरना

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

सील्ड रोड पर वाहनों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे को लेकर शिमला में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा। इस दौरान सचिवालय क्षेत्र में यातायात भी प्रभावित रहा। बाद में मुख्यमंत्री और अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक आयोजित की गई, जिसमें मामले पर विस्तार से चर्चा हुई।

शिमला

सील्ड रोड की आवाजाही को लेकर उठा मुद्दा

राजधानी शिमला में सील्ड रोड पर अधिवक्ताओं के वाहनों की आवाजाही को लेकर मंगलवार को अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच मतभेद का मामला सामने आया। प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़े बड़ी संख्या में अधिवक्ता अपनी मांगों को लेकर पहले मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर पहुंचे और बाद में सचिवालय के बाहर एकत्रित हुए। अधिवक्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से छोटा शिमला-सचिवालय-हाईकोर्ट मार्ग का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में इस मार्ग पर उनके वाहनों की आवाजाही को लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर अधिवक्ताओं ने प्रशासन से स्पष्ट नीति और परमिट व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान यातायात प्रभावित

सचिवालय के बाहर अधिवक्ताओं के धरने के दौरान सर्कुलर रोड और इससे जुड़े कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिसके कारण सरकारी कार्यालयों में आने-जाने वाले कर्मचारियों, स्थानीय निवासियों, पर्यटकों तथा स्कूलों से लौट रहे विद्यार्थियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा। यातायात पुलिस को विभिन्न स्थानों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। कुछ समय तक शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात की गति सामान्य से धीमी रही।

अधिवक्ताओं ने रखी अपनी मांग

अधिवक्ताओं का कहना था कि छोटा शिमला-सचिवालय-हाईकोर्ट मार्ग उनके लिए कार्यगत दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अदालत परिसर तक पहुंचने में कम समय लगता है। उनका तर्क था कि वर्तमान में उन्हें कार्ट रोड का उपयोग करने के लिए कहा जा रहा है, जबकि यह मार्ग पहले से ही यातायात के दबाव में रहता है। अधिवक्ताओं के अनुसार अदालतों में निर्धारित समय पर उपस्थित होना उनके पेशेगत दायित्व का हिस्सा है और लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाने से कार्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से अधिवक्ताओं के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक परमिट व्यवस्था लागू करने की मांग की।

वाहनों के चालान को लेकर भी उठी चर्चा

प्रदर्शन के दौरान सील्ड रोड पर वाहनों की आवाजाही और परमिट व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि इस मार्ग पर प्रवेश के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं तो उनका पालन सभी श्रेणियों के वाहनों पर समान रूप से होना चाहिए। इसी दौरान कुछ वाहनों की आवाजाही को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई गई, जिसके बाद पुलिस ने संबंधित वाहनों के दस्तावेजों और अनुमति की जांच की। जानकारी के अनुसार कुछ वाहनों के चालान भी किए गए। अधिवक्ताओं का कहना था कि नियमों के क्रियान्वयन में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बैठक के बाद समाप्त हुआ धरना

मामले को लेकर दोपहर बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक आयोजित की गई। बैठक में सील्ड रोड पर आवाजाही, परमिट व्यवस्था और अधिवक्ताओं की व्यावहारिक आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का आश्वासन दिया है। उनके अनुसार समिति संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त कर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर अधिवक्ताओं के लिए परमिट जारी करने और शुल्क निर्धारण संबंधी निर्णय लिया जाएगा। बार एसोसिएशन आवश्यक पात्र अधिवक्ताओं की सूची भी प्रशासन को उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद अधिवक्ताओं ने अपना धरना समाप्त कर दिया और आगे की प्रक्रिया का इंतजार करने की बात कही।

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