पांवटा साहिब में बिजली संशोधन विधेयक 2025 के विरोध में कर्मचारियों ने पेन डाउन–टूल डाउन हड़ताल की। निजीकरण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर विभिन्न मांगें उठाई गईं।
पांवटा साहिब
बद्रीपुर सब स्टेशन परिसर में धरना-प्रदर्शन
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group
बिजली बोर्ड के निजीकरण के विरोध में गुरुवार को इलेक्ट्रिकल डिवीजन पांवटा साहिब के बद्रीपुर स्थित 33 केवी सब स्टेशन परिसर में कर्मचारियों, अभियंताओं, पेंशनरों और आउटसोर्स कर्मियों ने पूर्ण पेन डाउन व टूल डाउन हड़ताल की। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम के तहत भोजनावकाश के दौरान बिजली बोर्ड कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया।
आपातकालीन सेवाएं रहीं जारी
हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गईं, जिससे आम उपभोक्ताओं को आवश्यक सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई।
संयुक्त कार्रवाई समिति की अगुवाई
संयुक्त कार्रवाई समिति के को-कन्वीनर ई. अमित कुमार और अमन यादव की अगुवाई में आयोजित इस प्रदर्शन में कर्मचारी संघ, अभियंता संघ, पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन और आउटसोर्स कर्मियों ने एकजुटता दिखाई।
विधेयक पर उठे सवाल
अभियंता संघ के महासचिव ई. मुकेश ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता खोलता है, जिसका प्रदेश के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में बिजली वितरण निजी हाथों में दिया गया, वहां अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी।
निजीकरण से रोजगार पर असर की आशंका
कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों इम्तियाज हाशमी, बॉबिन सिंह, सुनील कुमार और गौरव ठाकुर ने कहा कि एक ही क्षेत्र में कई वितरण कंपनियों को अनुमति देना और सरकारी नेटवर्क का निजी उपयोग राज्यों की शक्तियों को कमजोर करेगा। गोपाल (आउटसोर्स/क्लास-IV), हंसराज और अजय कुमार ने कहा कि निजीकरण से रोजगार के अवसरों में भारी गिरावट आएगी।
पेंशन और वित्तीय स्थिति पर चिंता
पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन के सतीश गुप्ता, पी.के. सिंघल और पूरण चंद ने कहा कि यदि औद्योगिक उपभोक्ता निजी कंपनियों की ओर चले गए तो बोर्ड की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी, जिससे पेंशन भुगतान और सेवा शर्तों पर असर पड़ेगा।
स्मार्ट मीटरिंग योजना पर भी सवाल
वक्ताओं ने स्मार्ट मीटरिंग योजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका आर्थिक बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है।
मुख्य मांगें और चेतावनी
संयुक्त कार्रवाई समिति के नेताओं ने मांग उठाई कि बिजली बोर्ड को निजी हाथों में देने के बजाय उसे सशक्त बनाया जाए। नई भर्तियां की जाएं, पुरानी पेंशन योजना बहाल हो, लंबे समय से कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए और लंबित सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। धरने में कर्मचारी संघ, अभियंता संघ और पेंशनर संगठनों के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। अंत में संयुक्त कार्रवाई समिति ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group





