भाजपा ने की सिरमौर के पांचों मंडल में अध्यक्ष की नियुक्ति

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2 पुराने चेहरों पर पार्टी ने जताया विश्वाश, जिला अध्यक्ष ने कहा- 2024 में निभाएंगे अपना दायित्व

HNN/ नाहन

जिला सिरमौर भारतीय जनता पार्टी ने पांचो मंडलो में अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है। यह नियुक्ति जिला सिरमौर के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं के विचार विमर्श से की गई है। इसमें नाहन मंडल से प्रताप ठाकुर पर दोबारा से पार्टी ने विश्वाश जताया है। प्रताप ठाकुर भाजपा के निष्ठावान व कर्मठ नेता है। जिन पर पार्टी ने विश्वाश जता कर दोबारा से कमान दी है।

इसी प्रकार रेणुका जी से भी राजेंदर ठाकुर को दोबारा से रेणुका भाजपा मंडल की कमान सौंपी गई है। जबकि पावंटा साहिब से रमेश तोमर के ऊपर पार्टी ने एक बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उन्हें पावंटा मंडल का दायित्व सौंपा गया है। इसी प्रकार शिलाई से इंद्र सिंह ठाकुर को शिलाई मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश हाईकमान ने पच्छाद विधानसभा में नरेंदर कुमार गोसांई को पच्छाद मंडल की कमान दी गई है।

प्रदेश भाजपा ने जिला के पांचो मंडलो में मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का भी बिगुल बजा दिया है। इन नियुक्तियों में नाहन व रेणुका जी में पिछले मंडल अध्यक्षों पर पार्टी ने दावं खेला है। जबकि अन्य मंडलो में नए चेहरों को जगह दी गई है। अब देखना यह है कि क्या यह मंडल अध्यक्ष 2024 में पार्टी के लिए क्या कर पा सकते है। यह तो आने वाला समय ही बता सकता है।

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह नियुक्तियां 2024 के लोकसभा चुनाव के मध्यनजर की गई है। जब जिला के वरिष्ट नेताओ से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि यह पार्टी की निरंतर कार्यकारिणी है जो समय रहते बदलाव करती रहती है। उधर, जिला सिरमौर भाजपा अध्यक्ष विनय गुप्ता ने बताया कि शनिवार को जिला के पांचो मंडलो में अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है।

उन्होंने बताया कि यह नियुक्तियां जिला के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से विचार विमर्श कर की गई है। उन्होंने बताया कि यह सभी मंडल अध्यक्ष भाजपा पार्टी के निष्ठावान व कर्मठ नेता है। जिन पर पार्टी ने विश्वाश जता कर जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि जिला में चुने गए पांचो मंडल अध्यक्ष आने वाले लोकसभा चुनाव में लोकसभा प्रत्याशी को भारी मतों से विजय बनाएंगे।

बरहाल देर आए दुरुस्त आए यानी स्लो एंड स्टेडी विन द रेस के फार्मूले पर अब डॉक्टर का फार्मूला काफी कारगर माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष न केवल संगठन बल्कि राजनीति में कूटनीति के भी माहिर माने जाते हैं। जाहिर है संगठन में जो देरी हुई है उसमें कहीं ना कहीं संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।