मॉडर्न वैल्यू शिक्षा को सनातनी प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य- जसविंदर वर्मा
डीएवी स्कूल नाहन के नए प्रधानाचार्य ने संभाला कार्यभार
HNN/नाहन
छात्रों के बीच किस प्रकार आधुनिक वैल्यू पर आधारित शिक्षा को सनातनी प्रणाली में बदला जाए इस दिशा में डीएवी स्कूल लगातार कार्य कर रहा है। भारतीय संस्कृति को सनातनी कला से जोड़कर युवा पीढ़ी से रूबरू करवाने को लेकर डीएवी स्कूल लगातार प्रयास कर रहा है। यह बात डीएवी पब्लिक स्कूल नाहन के नवनियुक्त प्रिंसिपल जसविंदर वर्मा ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोरोना के दौरान छात्रों के व्यवहार में परिवर्तन आया है उसका एक कारण मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल भी है। इसके लिए डीएवी प्रबंधन लगातार विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर रहा है। इसके लिए विशेष विशेषज्ञ काउंसलर को बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक अध्यापक का कोई विकल्प नहीं हो सकता।
जसविंदर वर्मा ने बताया कि आज बच्चों को ऐसी शिक्षा देने का समय है ताकि बच्चा शिक्षा ग्रहण करने के बाद समाज और राष्ट्र में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि आदिकाल से इंसान शिक्षा को व्यावसायिक रूप में ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर से जमा दो स्तर तक बच्चों को राष्ट्र निर्माण की संस्कृति के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा हंसराज के बताएं मार्ग से बच्चों को लगातार अवगत करवाया जाएगा ताकि बच्चों का सुनहरा भविष्य बन सके।
उन्होंने कहा के निकट भविष्य में स्कूल में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएगी जिसमें चरित्र निर्माण, योग शिविर, समर कैंप आदि भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में डीएवी स्कूल नाहन में बच्चों के लिए करियर काउंसलिंग कैंप लगाए जाएंगे जिसमें बच्चों को जानकारी दी जाएगी की इंजीनियरिंग व मेडिकल के अलावा भी अनेकों व्यवसायिक कोर्स ऐसे हैं जिसमें विद्यार्थी अपना बेहतरीन करियर बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि डीएवी स्कूल में प्रत्येक सप्ताह हर कक्षा में हवन किए जाते हैं तथा छात्रों को ऋग्वेद के मंत्रों की जानकारी कंठस्थ दी जाती है ताकि मन समाज व वातावरण में शुद्धिकरण आए। इसके अलावा प्रार्थना सभा में सृष्टि की शांति के लिए भी बाकायदा प्रतिदिन प्रार्थना की जाती है।
डीएवी स्कूल नाहन के नवनियुक्त प्रिंसिपल जसविंदर वर्मा ने बताया कि छात्रों द्वारा मोबाइल का कम से कम इस्तेमाल किया जाए इस दिशा में प्रतिदिन बच्चों की क्लास में काउंसलिंग की जाती है ।गुरु शिष्य की परंपरा को कायम रखा जाए तथा माता-पिता का मान सम्मान कर भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा का अनुसरण किया जाए।