लाहौल-स्पीति की स्पीति घाटी यूनेस्को विश्व बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क में शामिल, हिमाचल की वैश्विक पहचान मजबूत
लाहौल-स्पीति
हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को यूनेस्को के मानव और बायोस्फीयर (एमएबी) कार्यक्रम के तहत देश का पहला शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया गया है। यह मान्यता चीन के हांगझोउ में आयोजित 37वीं अंतरराष्ट्रीय समन्वय परिषद की बैठक में औपचारिक रूप से प्रदान की गई। इस उपलब्धि के साथ भारत के कुल 13 बायोस्फीयर रिजर्व अब एमएबी नेटवर्क में शामिल हो गए हैं।
7,770 वर्ग किलोमीटर में फैला रिजर्व
स्पीति कोल्ड डेजर्ट बायोस्फीयर रिजर्व 7,770 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें संपूर्ण स्पीति वन्यजीव प्रभाग, लाहौल वन प्रभाग का कुछ हिस्सा, बारालाचा दर्रा, भरतपुर और सरचू शामिल हैं। इसे कोर जोन (2,665 वर्ग किमी), बफर जोन (3,977 वर्ग किमी) और ट्रांजिशन जोन (1,128 वर्ग किमी) में बांटा गया है।
पारिस्थितिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
इस क्षेत्र में पिन वैली राष्ट्रीय उद्यान, किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, चंद्रताल आर्द्रभूमि और सरचू मैदान एकीकृत हैं। यहां 655 जड़ी-बूटियां, 41 झाड़ियां और 17 वृक्ष प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई औषधीय और स्थानिक पौधे शामिल हैं। यह सोवारिग्पा/आमची चिकित्सा परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों में हिम तेंदुआ, तिब्बती भेड़िया, लाल लोमड़ी, आइबेक्स, नीली भेड़, गोल्डन ईगल और बेयर्ड गिद्ध जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं।
वैश्विक संरक्षण मानचित्र पर हिमाचल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया और वन विभाग व वन्यजीव विंग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विकास और संरक्षण के बीच सामंजस्य बनाकर इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जाएगा। प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) अमिताभ गौतम ने कहा कि इस मान्यता से हिमाचल वैश्विक संरक्षण मानचित्र पर उभरेगा, जिम्मेदार इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
