विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना के तहत सिरमौर में 150 आवेदन स्वीकृत, 300 अंडर प्रोसेस
पारंपरिक कारीगरी को संरक्षण देकर कारीगरों और शिल्पकारों को बनाया जाएगा आर्थिक रूप से मजबूत व आत्मनिर्भर
HNN/नाहन
जिला सिरमौर में परंपरागत रूप से कार्य करने वाले बुनकरों, बढई, लोहारों, पत्थरों को तराशने वाले, मूर्तिकारों, कुम्हार, नाई, कपड़ा धोने वाले, राजमिस्त्री सहित सैकड़ों तरह के स्किल वर्क करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों के लिए विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत जिला सिरमौर में जहां 300 आवेदन आए हैं। तो वहीं 150 के लगभग आवेदनों को राज्य कमेटी से स्वीकृति मिल चुकी है।
जिनमें अधिकतर आवेदन फाउंड्री का कार्य करने वाले यानी लोहार, शूमेकर, परंपरागत सिरमौरी ड्रेसों का निर्माण करने वाले तथा राजमिस्त्री शामिल है। जाहिर है इस योजना के तहत आर्थिक रूप से मदद पाकर न केवल यह आवेदन करता आर्थिक रूप से मजबूत होंगे बल्कि गुरु शिष्य परंपरा सहित पुश्त दरपुश्त चली आ रही कारीगरी को भी संरक्षण मिलेगा। बता दें कि विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना के तहत ऑनलाइन अथवा लोक मित्र केंद्र से आवेदन किया जाता है।
इसके बाद आवेदनकर्ता के गांव का ग्राम प्रधान अथवा वार्ड मेंबर उसे आवेदन करता को प्रमाणित करता है। तीसरे चरण में आवेदन करता के आवेदन को जिला स्तरीय कमेटी अपनी स्वीकृति देने के बाद राज्य स्तरीय कमेटी को भेजते है। राज्य स्तरीय कमेटी इन आवेदन कर्ताओं के कार्ड बनाकर भेज देती है जिसके आधार पर इन्हें सबसे पहले संबंधित विषय पर स्किल ट्रेनिंग दी जाती है।
ट्रेनिंग के बाद संबंधित कार्य में इस्तेमाल होने वाले औजारों के लिए यानी टूल किट खरीदने के लिए 15000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यही नहीं कारोबार को बढ़ाने के लिए 5 फ़ीसदी ब्याज पर 100000 रुपए का ऋण भी उपलब्ध करवाया जाता है।
बरहाल योजना को लेकर जिस प्रकार लोगों ने अपनी रुचि दिखानी शुरू कर दी है निश्चित ही वह दिन दूर नहीं होगा जब एक बार फिर से हमें अपनी परंपरागत विरासतों को आने वाली कई पीढियां तक संरक्षण मिलेगा। उधर, योजना के नोडल ऑफिसर जिला महाप्रबंधक उद्योग विभाग साक्षी सती के द्वारा खबर की पुष्टि की गई है।