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शिमला में स्कूलों में बच्चों को कैद करने का मामला : अभिभावकों में हड़कंप

By NEHA Published: 12 Sep 2024, 10:28 AM | Updated: 12 Sep 2024, 12:10 PM 1 min read

HNN/शिमला

संजौली में मस्जिद निर्माण के खिलाफ हिंदू संगठनों की प्रदर्शन के दौरान शहर भर के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों को परेशानी हुई। जिला प्रशासन के स्थिति को बिगड़ता देख स्कूलों को बिना अभिभावकों के बच्चों को परिसर से न जाने देने के आदेशों के बाद अभिभावकों में हड़कंप मच गया। स्कूलों की बसों और स्कूली टैक्सियों से बच्चों की आवाजाही न करने के आदेश दिए गए। कई स्कूलों में 1:00 बजे छुट्टी होनी थी। यह बच्चे 3:00 से 4:00 बजे तक भूखे प्यासे बैठे रहे। अभिभावक सब काम धंधा छोड़कर बच्चों को लेने के लिए स्कूल दौड़ पड़े। शहर में प्रदर्शन के दौरान संजौली के लिए बंद रही बसों की आवाजाही के कारण अभिभावकों को पैदल स्कूल तक जाना पड़ा और वहां से अपने बच्चों को लेकर आना पड़ा।

अभिभावक मंगलवार को ही संजौली और शहर के स्कूलों शिक्षण संस्थानों के बंद होने के आदेशों के बारे में स्कूलों में पूछते भी रहे, बावजूद जिला प्रशासन ने नौनिहालों की सुरक्षा और अभिभावकों की इस परेशानी को देखते हुए शिक्षण संस्थानों को बंद रखने की जहमत नहीं उठाई। इसका खामियाजा स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों और अभिभावकों को परेशान होकर भुगतना पड़ा। संजौली और शहर के निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के गुस्साए अभिभावकों ने प्रदर्शन के दौरान प्रशासन मुर्दाबाद के नारे तक लगा दिए।

जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को जारी किए गए आदेशों में बुधवार को सुबह 7: 00 बजे से रात 11:59 बजे तक संजौली में धारा-163 लागू रहने के साथ स्कूल, कॉलेज, सरकारी और निजी कार्यालय, बाजार नियमित से रूप खुले रखे जाने और कानून और शांति व्यवस्था कायम करने को लेकर प्रभावी कदम उठाने के दावे किए थे। लेकिन हकीकत यह है कि स्कूली बच्चों और अभिभावकों को परेशानी हुई और प्रदर्शन के दौरान प्रशासन मुर्दाबाद के नारे तक लग गए।