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Pocso / रामपुर में पोस्को मामले में आरोपी को 20 वर्ष कारावास, अदालत ने जुर्माना और मुआवजा भी निर्धारित किया

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

Pocso : रामपुर स्थित अदालत ने नाबालिग से जुड़े पोस्को मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये जुर्माना और पीड़िता के लिए 2 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

शिमला/रामपुर बुशहर

अदालत का निर्णय
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर स्थित रामपुर की अदालत ने आरोपी ललित कुमार को पोस्को अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया है। न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे निर्धारित समय सीमा में जमा करना होगा। न्यायालय ने पीड़िता के हितों को ध्यान में रखते हुए उसे 2 लाख रुपये का मुआवजा देने के निर्देश भी जारी किए हैं।

मामले का विस्तृत विवरण
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना रात के समय की है, जब नाबालिग पीड़िता अपने कमरे में थी। उसी दौरान आरोपी, जो रिश्ते में पीड़िता की माता का भतीजा बताया गया है और पास में ही निवास करता था, कमरे में प्रवेश कर गया। उस समय पीड़िता की आयु लगभग 15 वर्ष थी। घटना के बाद पीड़िता ने प्रारंभिक रूप से इस संबंध में जानकारी साझा नहीं की। कुछ समय पश्चात स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर उसे चिकित्सीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां परीक्षण के दौरान स्थिति स्पष्ट हुई।

मामले का खुलासा और जांच प्रक्रिया
चिकित्सीय परीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा पुलिस को सूचित किया गया, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने विधिक प्रक्रिया के तहत जांच प्रारंभ की, साक्ष्य एकत्र किए, पीड़िता और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए तथा मामले से जुड़े सभी तथ्यों को क्रमबद्ध रूप से संकलित किया। जांच पूर्ण होने के उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

सुनवाई और साक्ष्यों का परीक्षण
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 19 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए गए। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अदालत ने विधिक प्रावधानों के अनुसार सजा निर्धारित करते हुए अंतिम निर्णय सुनाया।