शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को बहुचर्चित युग हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिमला द्वारा दोषियों को दी गई फांसी की सजा को पलटते हुए दो को उम्रकैद में बदल दिया, जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने साफ किया कि दोषियों को अब जीवन के अंतिम दिन तक जेल में ही रहना होगा।
युग के पिता फैसले से असंतुष्ट
इस फैसले के बाद मासूम युग के पिता विनोद कुमार गुप्ता भावुक हो गए और मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके बेटे को न्याय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अब वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। विनोद गुप्ता ने कहा, “बच्चे के लिए जी रहे थे, उसके लिए सबकुछ खत्म कर देंगे। दोषी पकड़े गए भगवान की देन थी, लेकिन कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।”
मामले की पृष्ठभूमि
14 जून 2014 को शिमला के रामबाजार से फिरौती के लिए 4 वर्षीय युग का अपहरण किया गया था। अगस्त 2016 में भराड़ी पेयजल टैंक से उसका कंकाल बरामद हुआ। आरोपियों ने उसके गले में पत्थर बांधकर पानी से भरे टैंक में जिंदा फेंक दिया था। इस निर्मम वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group
जिला अदालत का फैसला और हाईकोर्ट का रुख
जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने 5 सितंबर 2018 को तीनों दोषियों—चंद्र शर्मा, तेजिंद्र पाल और विक्रांत बख्शी—को फांसी की सजा सुनाई थी और इसे दुर्लभ में दुर्लभतम श्रेणी का अपराध करार दिया था। हाईकोर्ट में दोषियों ने इस फैसले को चुनौती दी। अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की विशेष खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा और अब सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
वकीलों की दलीलें और अदालत का निर्णय
दोषियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने उनकी उम्र, व्यवहार और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड न दिए जाने की अपील की। वहीं, प्रदेश सरकार ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए फांसी की सजा बरकरार रखने की मांग की। अंततः हाईकोर्ट ने दो को उम्रकैद और एक को बरी करने का आदेश दिया।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group





