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सढौरा से रेनू बाला कांग्रेस की उम्मीदवार तो नारायणगढ़ से..

Shailesh Saini 7 Sep 2024 Edited 7 Sep 1 min read

सिटिंग विधायक राजपाल का का टिकट काटकर कांग्रेस की राहे क्यों होंगी मुश्किल.. क्या शैली चौधरी के सर फिर सजेगा ताज.. क्या राजपाल थामेंगे इस पार्टी का हाथ..

HNN News नाहन

आम आदमी पार्टी से सहमति न बनते हुए कांग्रेस पार्टी ने 32 उम्मीदवारों के साथ अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। हालांकि कांग्रेस ने 31 विधायकों में से 28 विधायकों को यथावत रखा है। मगर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के क्षेत्र के नारायणगढ़ से जहां रामकिशन गुर्जर की पत्नी शैली चौधरी को मजबूत दावेदारी के साथ मैदान में उतर गया है तो सढौरा के सिटिंग विधायक राज्यपाल का पत्ता इस बार साफ कर कांग्रेस ने अपनी रहे आफत में डाल दी हैं।
यहां पर दोनों सीटों पर महिला प्रत्याशियों को उतारा गया है। जिसमें नारायणगढ़ से शैली चौधरी तथा सढ़ौरा से राजपाल की जगह रेनू बाला को टिकट दिया गया है। अन्य विधानसभा क्षेत्र के साथ लगती बरवाला विधानसभा से फिलहाल प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है इस सीट पर भी कांग्रेस के विधायक रामनिवास फिर से टिकट की दावेदारी में है।
अब बता दे कि साढ़ौरा से राजपाल का टिकट कटने के बाद कांग्रेस की स्थिति इस सीट पर काफी कमजोर पड़ गई है।
इसकी बड़ी वजह यह भी मानी जा सकती है की राजपाल को गुर्जर वोट का बड़ा समर्थन रहा है तो वही बहुजन समाजवादी पार्टी ने 2019 के चुनाव में अच्छा खासा वोट बैंक जुटाया था। 2019 के चुनाव में बीएसपी का वोट शेयर 15.7 फ़ीसदी कांग्रेस का 40 फ़ीसदी तथा भाजपा का 29.7 फ़ीसदी रहा है।
अब थोड़ा सा और समझने की जरूरत है इस विधानसभा क्षेत्र में सनी 3.8 फ़ीसदी खान 3.7 फ़ीसदी तथा चौधरी 0.1 फ़ीसदी है। बाकी और बहुत सी जातियां भी है और यह सीट sc रिजर्व सीट है।
संभावना तो यह भी है कि कांग्रेस के सिटिंग विधायक राजपाल का टिकट कटने के बाद वह बसपा से भी अपनी दावेदारी ठोक सकते हैं।
यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि सैनी समुदाय का वोट बैंक मुख्यमंत्री नायक सिंह सैनी के चलते भाजपा को ही जाएगा। मजे की बात तो यह है कि सिटिंग विधायक राजपाल सैनी बिरादरी पर भी अच्छी पकड़ रखते थे। ऐसी परिस्थितियों में रेनू बाला की जीत में आंकड़े साथ देते नजर नहीं आते हैं।
उधर नारायणगढ़ सीट की अगर बात की जाए तो यहां भी कांग्रेस ने अपनी सिटिंग विधायक शैली चौधरी पर फिर से भरोसा जताया है। शैली चौधरी अपनी मिलन सार प्रवृत्ति और जनता में बीते 1 वर्ष में जो लोकप्रियता हासिल की है उससे संभावित भाजपा प्रत्याशी की रहे मुश्किल में पढ़ सकती है।
कमोबेश इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को किसी भी सूरत में जीत मिलती नजर नहीं आती है मगर कांग्रेस ने जहां गुर्जर वोट बैंक को आधार बनाकर शैली चौधरी को मैदान में उतारा है उसे जीत के समीकरण काफी मजबूत भी बनते हैं।
यह क्षेत्र मुख्यमंत्री का कर्म क्षेत्र माना जाता है मगर लंबे अरसे से अपने क्षेत्र से बनाई गई दूरियां और क्षेत्र को विकास के हाशिए से दूर रखकर जो खाई खनन मंत्री रहने के दौरान बनाई थी वह पहले से भी ज्यादा बड़ी हो चुकी है। ऐसे में भाजपा यहां कूटनीति का सहारा लेते हुए आजाद उम्मीदवारों को बिहाइंड द वॉल स्पॉट दे सकती है।
कुल मिलाकर कहां जा सकता है कि नायब सिंह सैनी भले ही अपनी सीट पर जीत जाए मगर अपने गृह क्षेत्र से भाजपा को जीत दिला पाए ऐसा नजर नहीं आता है। हां यह जरूर कहा जा सकता है कि अब नायब सिंह सैनी कूटनीति के मास्टर हो चुके हैं ऐसी स्थिति में विभाजन वादी नीति में उनका कोई खेल या खेला जाए उसे संभावना से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता।

चलिए कांग्रेस के द्वारा जारी पहली लिस्ट की जानकारी भी हम आपको दे देते हैं। यहां पर कालका से प्रदीप चौधरी नारायणगढ़ से शैली चौधरी रादौर से बिशनलाल सैनी, सढौरा रिजर्व सीट पर रेनू वाला, लाडवा से मेवा सिंह , शाहाबाद sc रिजर्व सीट पर रामकरण उर्फ काला भाई, नीलोखेड़ी से धर्मपाल यह भी एससी रिजर्व है।
असंघ से शमशेर सिंह गोगी, समालखा से धर्म सिंह, आरक्षित इसराना से बलबीर वाल्मीकि, खरखौदा से जयवीर सिंह, सोनीपत से सुरेंद्र पवार गोहाना से जसवीर सिंह मलिक, बड़ौदा से ईन्दू राज नरवाल, जुलाना से विनेश फोगाट ,
सफीदों से सुभाष गंगोली, डबवाली से अमित सिहाग, कलावाली एससी रिजर्व सीट पर शीशपाल केहरवाल, गढी सांपला किलोई से भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कलानौर से शकुंतला खटक यह सीट भी एससी रिजर्व है।
रोहतक से भारत भूषण बत्रा, बहादुरगढ़ से राजेंद्र, बदली से कुलदीप ,झज्जर sc रिज़र्व से गीता भुक्कल, बेरी से रघुवीर कादियान, महेंद्रगढ़ से राव दान सिंह, रेवाड़ी से चिरंजीव राव,नूंह से आफताब अहमद, फिरोजपुर झिरका से माम खान,पुनहाना से मोहम्मद इलियास, फरीदाबाद एनआईटी से नीरज शर्मा, होडल sc रिजर्व सीट से उदय भान को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया है।
बड़ी बात तो यह है कि इनमें सरकार से समर्थन वापस लेने वाले निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर भी शामिल है।