HNN/ शिमला
सर्दियों में कई बीमारियां बढ़ जाती हैं खासतौर से हार्ट अटैक का खतरा इस मौसम में ज्यादा होता है। ठंड के मौसम में दिल के दौरे अधिक और गंभीर तरीके से आते हैं। सर्दी में ब्लड प्रेशर व मधुमेह के रोगियों का रक्तचाप और ब्लड शुगर बढ़ जाता है। उच्च रक्तचाप व मधुमेह को नियंत्रित करके इस बीमारी से बचा जा सकता है। सर्दी के मौसम में सबसे अधिक परेशानी बूढ़ों, बच्चों, हृदय, गुर्दा और लकवा के रोगियों को होती है।
बता दें, प्रदेश में सर्दियों के दौरान हर माह करीब 250 लोगों को हृदयाघात होता है। इनमें आठ प्रतिशत की मृत्यु हो जाती है। 25 वर्ष के युवाओं में भी हृदयाघात के मामले आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार दिनचर्या में परिवर्तन, जिसमें शारीरिक श्रम में कमी और फास्ट फूड का ज्यादा सेवन भी हृदयाघात के साथ अन्य बीमारियों का कारण बन रहा है।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group
उधर, आईजीएमसी शिमला के कार्डियोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर पीसी नेगी का कहना है कि सर्दियों में हृदयाघात का खतरा ज़्यादा बना रहता है। उपचार में देरी हुई तो मरीज को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है। ऐसे में हृदयाघात के बाद तीन घंटे उपचार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जिससे मरीज की जान को बचाया जा सकता है।
हृदयाघात के लक्षण
सीने में बाईं तरफ दर्द जो हाथों की ओर या पीठ की ओर बढ़ने लगता है।
दर्द असहनीय होता है।
पसीना, उल्टी, शरीर का ठंडा पड़ना।
शुगर के मरीज व बूढ़े लोगों को ठंड में पसीना आना।
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द के साथ पसीना आना।
बचाव के उपाय
बढ़ती ठंड में मदिरापान, धूम्रपान व कोल्ड एक्सपोजर से बचें।
शयन कक्ष में हवा आने-जाने की व्यवस्था हो, बंद कमरे में विश्राम से बचें।
सुबह सैर के प्रति सजग रहें, इस दौरान गर्म कपड़े पहनें।
उच्च रक्तचाप व शुगर को नियंत्रित रखें।
सर्दी, जुकाम, दमा, अटैक का समुचित व समय पर उपचार कराएं।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group