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सिरमौरी पारंपरिक परिधानों के सौंदर्यीकरण का कार्य आरंभ

By Ankita Published: 19 Jul 2024, 5:14 PM | Updated: 19 Jul 2024, 6:18 PM 1 min read

जोगेंद्र हाब्बी व गोपाल हाब्बी के निर्देशन में कलाकार उकेर रहे आकर्षक डिजाइन

HNN/ नाहन

सिरमौर जिला की वेशभूषा एवं लोक नृत्य में प्रयोग किए जाने वाले पारंपरिक परिधानों को सुंदर व आकर्षक बनाने का कार्य इन दिनों राजगढ़ उपमंडल में आरंभ किया गया है। हाब्बी मान सिंह कला केंद्र के संस्थापक एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार जोगेंद्र हाब्बी ने कहा कि उनके द्वारा बिना किसी वित्तीय सहायता के स्वयंसेवी रूप से कलाकारों को प्रशिक्षण प्रदान करके लगभग पिछले दो महीनों से परिधानों पर कढ़ाई करने का कार्य प्रगति पर हैं।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों के परिधानों की अपेक्षा सिरमौर जिला के पारंपरिक परिधान काफी सीधे सादे हैं। किन्नौर, लाहौल स्पीति, कुल्लू, चंबा आदि अन्य जिलों के परिधानों की सुंदरता में पिछले कई दशकों से काफी बदलाव आया है। मगर सिरमौर जिला में यहां के परिधानों की सुंदरता को बढ़ाने के प्रयास का अभाव रहा।

परिधानों को आकर्षक बनाने की जरूरत को महसूस करते हुए जोगेंद्र हाब्बी द्वारा पारंपरिक तरीके से कढ़ाई करके परिधानों को और अधिक आकर्षक बनाने का कार्य आरंभ किया गया है। परिधानों पर कढ़ाई के लिए डिजाइनिंग का कार्य उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित युवा कलाकार गोपाल हाब्बी द्वारा पद्मश्री विद्यानंद सरैक व जोगेंद्र हाब्बी के मार्गदर्शन में किया गया।

गोपाल हाब्बी द्वारा परिधानों पर बनाई जाने वाली आकृतियों के मास्टर डिजाइन तैयार करके सांस्कृतिक दल के कलाकारों को प्रशिक्षण प्रदान कर उनसे पारंपरिक परिधानों पर कढ़ाई का कार्य करवाया जा रहा है। हाब्बी ने कहा कि पारंपरिक परिधानों के माध्यम् से भी सिरमौर की संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो इसलिए परिधानों पर सिरमौर जिला में विशेष पहचान रखने वाले डांगरा, ठोडा नृत्य, रिहाल्टी, देव पालकी, देव शिरगुल व देव परशुराम की मंदिर स्थलियों के चित्र आदि की आकृतियां को पारंपरिक तरीके से हाथ से कढ़ाई करके उकेरा जा रहा है।