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सिरमौर के कंधों पर भाजपा-कांग्रेस का भार, 2027 में प्रदेश के साथ-साथ दोनों के लिए अपना ही जिला बनेगा चुनौती

Shailesh Saini 23 Nov 2025 Edited 23 Nov 1 min read

एक ही जिले से दोनों दलों के अध्यक्ष: सिरमौर में कांटेदार ‘सरदारी’ का ताज, क्या टूटेगी ‘रिपीट न होने’ की रवायत?

शैलेश सैनी ​नाहन

​हिमाचल प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को जिला सिरमौर से मिले नए प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ अब तेज हो गई हैं। इसकी बड़ी वजह जहाँ दो साल के बाद विधानसभा चुनाव का होना है तो वहीं एक ही जिला से भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का होना प्रमुख है।

पेंडुलम’ माने जाने वाली प्रदेश की राजनीति में हर 5 साल के बाद सरकार बदलने की रवायत रही है। ऐसे में वर्ष 2027 कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

भाजपा में जहाँ गुटबाजी का महासंग्राम अंदर खाते चला हुआ है, तो वहीं कांग्रेस में संगठन और सरकार के बीच में न तो पहले कभी तालमेल रहा है और न ही भविष्य में इसकी संभावनाएं नजर आती हैं।

फैक्टर जो तय करते हैं सत्ता की इबारत

​पूर्व में रहे कांग्रेस के मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के अभूतपूर्व विकास और भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे जयराम ठाकुर की ताबड़तोड़ विकास की घोषणाओं के बावजूद, दोनों ही दिग्गज अपनी सरकार को रिपीट करने में कामयाब नहीं रहे थे।

इसका सबसे बड़ा कारण हर 5 साल के दौरान कर्मचारी वोट बैंक माना जाता है, जो कि हर पांच साल के बाद दोनों प्रमुख दलों पर भारी रहता है। इस प्रमुख फैक्टर के बाद जातिगत फैक्टर दूसरे नंबर पर आता है। जाहिर है, ऐन चुनाव के वक्त पर प्रदेश का मतदाता किए गए विकास को लगभग भूल जाता है।

सिरमौर में ‘वीरभद्र गुट’ की स्थिति

कुल मिलाकर कहा जाए तो सुखविंदर सिंह सुक्खू गुट अपने मंसूबे में कामयाब हुआ है। मौजूदा नए प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार वीरभद्र गुट के माने जाते हैं। जिला सिरमौर में ही बात की जाए तो पोंटा साहिब में पूर्व में विधायक रहे कर्नेश जंग और पच्छाद से बार-बार हार चुके पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जीआर मुसाफिर ही वीरभद्र गुट से रहे हैं।

सरकार की मौजूदा स्थिति और प्रदेश में भाजपा के संगठन की मजबूत होती जा रही पकड़ ने 2027 की इबारत पहले ही लिख दी है। ऐसे में कांग्रेस को मिले नए प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के सिर पर लगाया गया सरदारी का ताज कांटों से भरा नजर आ रहा है।

रेणुकाजी में भाजपा का बड़ा दाँव?

जानकारी तो यह भी है कि वर्ष 2027 में भाजपा भी श्री रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र से विनय कुमार की टक्कर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतार सकती है जिसकी काट विनय कुमार के पास होगी ही नहीं।

हालाँकि संगठनात्मक तौर पर भाजपा इस विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल काफी कमजोर है, मगर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष खुद सिरमौर जिला से ही ताल्लुक रख रहे हैं। ऐसे में वह कब बड़ा दांव खेल जाए, कहा नहीं जा सकता।

विकास की अपार संभावनाएं होने के बावजूद, मौजूदा नए प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार उन संभावनाओं को पटल पर उतार नहीं सके हैं। जबकि आने वाले चुनावों में भाजपा के तरकश में रेणुका जी डैम के अलावा पर्यटन को कैश करने का वृहद प्लान कांग्रेस के भावी प्रत्याशी के लिए भारी पड़ेगा। भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पहले ही रोप वे सर्किट का सुनहरा सपना दिखा चुके हैं।

कांग्रेस की देरी, भाजपा का होमवर्क पूरा

संगठन को चलाने के जबरदस्त अनुभव के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लगातार प्रदेश भ्रमण पर हैं और उन्हें रणनीति बनाने में काफी अच्छा समय मिला है, जबकि कांग्रेस के द्वारा नए प्रदेश अध्यक्ष बनाने में की गई देरी काफी नुकसानदायक साबित रहेगी।

बहरहाल देखना अब यह होगा कि जहाँ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अपना होमवर्क लगभग पूरा करने में सफल हो चुके हैं और बाकी का बचा समय यदि वह नाहन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं तो उसके लिए उनके पास पर्याप्त समय भी होगा, वहीं श्री रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने विनय कुमार बाकी बचे दो सालों में संगठन को मजबूत करेंगे या फिर अपने लिए अपने विधानसभा क्षेत्र में समय देंगे – यह देखना अब बाकी है।