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हाई कोर्ट के फैसले का गुर्जर समाज ने तहे दिल से किया आभार व्यक्त

By PARUL Published: 4 Jan 2024, 7:51 PM | Updated: 4 Jan 2024, 7:53 PM 1 min read

HNN/नाहन

हाई कोर्ट के अंतरिम फैसले का गुर्जर समाज स्वागत करता है। हमें हमेशा से भरोसा था कि कोर्ट से हमें न्याय मिलेगा। क्योंकि हमारा विरोध तथ्यों और वास्तविकता पर आधारित था। प्रदेश के पिछड़े वंचित वर्ग के साथ हो रहे अन्याय और हमारी आशंकाओं का संज्ञान लेने और एक ऐतिहासिक अंतरिम जजमेंट के लिए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के तहे दिल से आभारी है और इससे न्यायपालिका में हमारा विश्वास और भी गाढ़ा हो गया।

आज का दिन गुर्जर समाज के संघर्ष में एक स्वर्णिम दिन है। जिससे हमारे समुदाय के आम जनमानस को एक राहत मिली है और हर वो आदमी जो इस संघर्ष का हिस्सा बना, बधाई का पात्र है। इसके अलावा हम गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति को भी शुभकामनाएं देते है। उन्होंने कहा कि उनके संघर्ष ने हमें हमेशा से प्रेरणा दी और बड़े भाई की तरह इस संघर्ष की अगुवाई की, उनके साथ के बिना यह संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि हम इस बात को समझते है अभी लंबी लड़ाई बाकी है और इसमें कई उतार चड़ाव आयेंगे। परन्तु हमें आशा है कि अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई मे आखिरकार जीत हमारी ही होगी।

उन्होंने कहा कि हाटी आरक्षण बिल पर हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश रिज़र्व करने के बावजूद राज्य सरकार ने इसको लागू करने का आदेश जारी कर दिया। जो कि न सिर्फ कोर्ट के आदेश की अवहेलना और संवैधानिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। बल्कि अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की लूट और आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ये तो स्पष्ट कर दिया था कि अनुसूचित जातियाँ इसमें नहीं आयेंगी। परंतु ये कहीं नहीं बताया कि कौन सी जातियाँ आयेंगी।

उन्होंने कहा कि टीआरटीआई द्वारा तैयार की गयी काल्पनिक रिपोर्ट में भी कहीं ये नहीं लिखा कि राजपूत और ब्राह्मण जैसी सवर्ण जातियाँ हाटी समुदाय का हिस्सा है। अनुसूचित जातियों के अलावा अनेकों जातियाँ गिरिपार मे रहती है क्या वो सब आदिवासी बन गए। कौन से वर्ष से पहले बसे लोगों को गिरिपार का मूलनिवासी माना जाए इस बात का भी कोई जिक्र नहीं है। जो लोग बाहर से जाकर वहाँ बसे है क्या वो भी मूलनिवासी मान लिए गए है?

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी स्पष्टिकरण में कहा गया कि क्योंकि एससी और एसटी लिस्ट परस्पर व्ययवर्तक है और चूंकि एससी लिस्ट मे आनी वाली जातियों को एससी लिस्ट से नहीं निकाला गया। इसलिए गिरिपार का एससी समुदाय एसटी मे नहीं आयेगा। परंतु यह बात ओबीसी कैटेगरी पर भी लागू होती है उन्हें भी ओबीसी लिस्ट से नहीं निकाला गया तो फिर ओबीसी मे आने वाले भाट ब्राह्मणों को कैसे एसटी मे डाला जा रहा है या फिर वो दोनों सर्टिफिकेट लेते रहेगे? क्या पहले जारी किये गए ओबीसी और ईडब्ल्यूसी प्रमाण पत्र निरस्त किये जायेंगे?

उन्होंने कहा कि ताज्जुब की बात तो यह है कि इस आधार पर राजनीतिक दबाव के चलते कुछ अधिकारी सर्टिफिकेट भी बाँटने लगे हम उनसे पूछना चाहते है कि क्या उन्होंने दिव्य दृष्टि से आकलन कर लिया कौन हाटी है और कौन नहीं? क्योंकि रेवेन्यू रिकॉर्ड मे हाटी जाती दर्ज नहीं जिसकी पुष्टि सरकार ने खुद की है। हाई कोर्ट का यह फैसला बहुत ही सही समय पर आया है जिसने संविधानिक व्यवस्था को बचाने का काम किया है।