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हिमाचल के निकाय चुनाव में बदला पूरा खेल, सिरमौर की दो बड़ी सीटों पर सबसे बड़ा उलटफेर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 5 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश में निकाय चुनाव से पहले आरक्षण अधिसूचना जारी होने से चुनावी समीकरण बदल गए हैं। महिलाओं को इस बार व्यापक प्रतिनिधित्व मिला है, जिससे कई पुराने दावेदार प्रभावित हुए हैं। सिरमौर जिले की प्रमुख सीटों पर आरक्षण ने सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव पैदा किया है।

शिमला

हिमाचल प्रदेश के शहरी निकाय चुनावों से पहले जारी आरक्षण अधिसूचना ने कई जगहों पर पूरा चुनावी गणित बदल दिया है

हिमाचल प्रदेश के शहरी निकाय चुनावों से पहले जारी आरक्षण अधिसूचना ने कई जगहों पर पूरा चुनावी गणित बदल दिया है। शहरी विकास विभाग द्वारा नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पदों तथा वार्डों के लिए आरक्षण तय किए जाने के बाद अब प्रदेशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं को मिले व्यापक आरक्षण के रूप में सामने आया है, जिससे कई पुराने दावेदारों की उम्मीदों को झटका लगा है और कई नए चेहरे मैदान में उतरने की स्थिति में आ गए हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा सिरमौर जिले को लेकर है, जहां नगर परिषद नाहन और नगर परिषद पांवटा साहिब दोनों महिला वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई हैं

सबसे ज्यादा चर्चा सिरमौर जिले को लेकर है, जहां नगर परिषद नाहन और नगर परिषद पांवटा साहिब दोनों महिला वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। इन दोनों निकायों को लेकर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर कई संभावित उम्मीदवार सक्रिय थे, लेकिन आरक्षण सूची सामने आते ही दोनों जगहों पर सियासी तस्वीर एक झटके में बदल गई है। अब नाहन और पांवटा साहिब की राजनीति में महिला नेतृत्व की सीधी एंट्री होने जा रही है, जिससे दोनों शहरों में चुनावी मुकाबला पूरी तरह नए अंदाज में देखने को मिलेगा।

आरक्षण अधिसूचना के बाद अब यह भी साफ हो गया है कि इस बार शहरी निकाय चुनावों में महिलाओं की भागीदारी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावशाली रहने वाली है

आरक्षण अधिसूचना के बाद अब यह भी साफ हो गया है कि इस बार शहरी निकाय चुनावों में महिलाओं की भागीदारी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावशाली रहने वाली है। प्रदेश के कई नगर निकायों में अध्यक्ष पदों के साथ-साथ बड़ी संख्या में वार्ड भी महिला वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि अब स्थानीय राजनीति में महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ेगी और कई जगहों पर चुनावी कमान परिवारों के पुरुष चेहरों से हटकर महिला प्रत्याशियों के हाथ में जाती दिखेगी।

सिरमौर के अलावा अन्य जिलों में भी आरक्षण ने चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दिया है

सिरमौर के अलावा अन्य जिलों में भी आरक्षण ने चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दिया है। कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, बिलासपुर और हमीरपुर जैसे जिलों में भी कई नगर परिषदों और नगर पंचायतों में महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति महिला और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं। इससे अब चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं और दावेदारों को यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी राजनीतिक जमीन बची है या बदल गई है।

कांगड़ा जिले के कई शहरी निकायों में इस बार महिला आरक्षण प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया है

कांगड़ा जिले के कई शहरी निकायों में इस बार महिला आरक्षण प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया है। नूरपुर में कई वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि एक वार्ड अनुसूचित जाति के लिए रखा गया है। शाहपुर में महिला, अनुसूचित जाति महिला और अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षण तय हुआ है। इसी तरह नगरोटा बगवां और अन्य शहरी निकायों में भी महिलाओं को प्रमुख हिस्सेदारी दी गई है, जिससे वहां भी चुनावी मुकाबले का स्वरूप बदलना तय है।

कुल्लू जिले में भी आरक्षण सूची ने कई नए संकेत दिए हैं

कुल्लू जिले में भी आरक्षण सूची ने कई नए संकेत दिए हैं। नगर परिषद कुल्लू में महिला वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति महिला, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए भी अलग-अलग वार्ड तय किए गए हैं। वहीं मनाली में भी महिला वर्ग को बड़ा प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि कुछ वार्ड अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लिए आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में कुल्लू और मनाली दोनों जगहों पर अब नए चेहरे और नए समीकरण चुनावी केंद्र में आ सकते हैं।

मंडी जिले में भी इस बार महिला आरक्षण का असर साफ दिख रहा है

मंडी जिले में भी इस बार महिला आरक्षण का असर साफ दिख रहा है। सरकाघाट में महिला और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सीटों का संतुलित बंटवारा किया गया है, जबकि रिवालसर में महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नेरचौक में महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए कई वार्ड आरक्षित किए गए हैं। वहीं जोगिंद्रनगर और सुंदरनगर में भी महिला वर्ग को बड़ी हिस्सेदारी मिलने से वहां का चुनावी माहौल पूरी तरह बदल गया है।

शिमला जिले के कई निकायों में भी आरक्षण लागू होने के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है

शिमला जिले के कई निकायों में भी आरक्षण लागू होने के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। रामपुर, ठियोग, कोटखाई और चौपाल जैसे क्षेत्रों में अब वार्डों और पदों का समीकरण बदलने के बाद नए दावेदार सक्रिय हो गए हैं। कई ऐसे नेता, जो लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, अब आरक्षण बदलने के कारण सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। वहीं दूसरी ओर कई महिला चेहरे अब पहली बार मजबूती के साथ सामने आने की स्थिति में हैं।

बिलासपुर, हमीरपुर और अन्य जिलों में भी यही स्थिति बनी हुई है

बिलासपुर, हमीरपुर और अन्य जिलों में भी यही स्थिति बनी हुई है। वार्डों के आरक्षण ने कई जगहों पर चुनावी तस्वीर बदल दी है। राजनीतिक दलों के लिए भी यह अधिसूचना बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि अब वे आरक्षण के हिसाब से अपने संभावित प्रत्याशियों का चयन करेंगे। स्थानीय स्तर पर भी अब वार्ड-वार बैठकों, रणनीति निर्माण और दावेदारी की गतिविधियां तेज होना तय माना जा रहा है।

शहरी विकास विभाग की इस अधिसूचना ने एक तरह से चुनावी प्रक्रिया को जमीन पर उतार दिया है

शहरी विकास विभाग की इस अधिसूचना ने एक तरह से चुनावी प्रक्रिया को जमीन पर उतार दिया है। अब तक जो चर्चा केवल संभावनाओं तक सीमित थी, वह अब वास्तविक राजनीतिक तैयारी में बदलती दिखाई दे रही है। खासतौर पर सिरमौर जैसे जिलों में, जहां नाहन और पांवटा साहिब जैसे बड़े शहरी निकाय महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं, वहां आने वाले दिनों में चुनावी सरगर्मी और तेज होने की पूरी संभावना है।

कुल मिलाकर, इस बार के शहरी निकाय चुनावों की सबसे बड़ी तस्वीर यही है कि महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला है

कुल मिलाकर, इस बार के शहरी निकाय चुनावों की सबसे बड़ी तस्वीर यही है कि महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला है और आरक्षण सूची ने प्रदेश की शहरी राजनीति में एक नया संतुलन पैदा कर दिया है। अब नजर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर टिकी है, जिसके बाद प्रदेशभर में शहरी निकाय चुनाव पूरी तरह राजनीतिक केंद्र में आ जाएंगे।