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हिमाचल 181 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला: सीबीआई जांच पूरी, अब आरोपियों का ट्रायल शुरू

हिमाचलनाउ डेस्क | 9 दिसंबर 2024 at 8:04 am

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घोटाले का विवरण

हिमाचल प्रदेश में 181 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अब आरोपियों के खिलाफ ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह घोटाला वर्ष 2013 से 2017 के बीच हुआ था और इसमें 175 से अधिक आरोपी शामिल हैं। आरोपियों में 20 शिक्षण संस्थानों के संचालक, प्रदेश शिक्षा विभाग के अधिकारी, और बैंक के कर्मी शामिल हैं।

जांच और गिरफ्तारी

सीबीआई की कार्रवाई

सीबीआई ने जांच के दौरान 20 शिक्षण संस्थानों और उनके संचालकों, प्रदेश शिक्षा विभाग, बैंक अधिकारियों, और अन्य निजी संस्थानों के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की। अब तक 175 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कोर्ट में पांच चालान पेश किए जा चुके हैं। ट्रायल के दौरान इन आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।

दोषी अधिकारी और संस्थान

इस मामले में उच्च शिक्षा निदेशालय शिमला के तत्कालीन कर्मचारियों, शैक्षणिक संस्थाओं के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, निदेशकों, और कर्मचारियों के अलावा, बैंक कर्मियों तथा प्रदेश के बाहर के निजी संस्थानों के अधिकारियों पर भी आरोप हैं।

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घोटाले का प्रकटन और संदिग्ध प्रक्रियाएं

छात्रवृत्ति वितरण में गड़बड़ी

हिमाचल प्रदेश में छात्रवृत्ति के लिए केंद्र सरकार की योजना थी, जो अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए थी। इस योजना के तहत 80 प्रतिशत बजट निजी संस्थानों को और 20 प्रतिशत सरकारी संस्थानों को आवंटित किया गया था। लेकिन इस वितरण में कई अनियमितताएं पाई गईं।

फर्जी आवेदन और बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया

घोटाले में यह पाया गया कि निजी शिक्षण संस्थानों ने विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले और सरकारी धनराशि को हड़प लिया। इसके अलावा, छात्रवृत्ति पोर्टल में भी कई खामियां पाई गईं, जिससे घोटाला और भी विस्तृत हुआ।

आर्थिक अपराध और संपत्ति अटैचमेंट

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई

घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी बड़ी कार्रवाई की है। 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की गई हैं, इसके अलावा 14 बैंक खातों में जमा राशि भी इस कार्रवाई में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत सीबीआई की एफआईआर के आधार पर जांच जारी रखी है।

न्यायिक निगरानी

इस मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में की जा रही है, और जांच के दौरान हर स्तर पर घोटाले की गहरी छानबीन की जा रही है। सरकार और जांच एजेंसियों द्वारा घोटाले के दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।

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